NATO को सबक सिखाएंगे पुतिन! टॉप सीक्रेट जगह पर रूस ने शुरू किया वॉर ड्रिल, बॉर्डर पर पांच स्तर की सुरक्षा

Russia NATO conflict 2025: यूरोप की फिजाओं में फिर से बारूद की बू घुलने लगी है. यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच अब एक नई चिंता गहराने लगी है, क्या रूस अब यूक्रेन के बाद बाल्टिक देशों या बेलारूस की ओर बढ़ने वाला है?

Putin will teach NATO a lesson! Russia started war drill at a top secret place
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Russia NATO conflict 2025: यूरोप की फिजाओं में फिर से बारूद की बू घुलने लगी है. यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच अब एक नई चिंता गहराने लगी है, क्या रूस अब यूक्रेन के बाद बाल्टिक देशों या बेलारूस की ओर बढ़ने वाला है? अमेरिका की खुफिया एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं जो इस ओर इशारा कर रहे हैं कि पुतिन की नजरें यूक्रेन से आगे बढ़कर रूस के पुराने साम्राज्य को फिर से स्थापित करने पर हैं. इस आशंका ने बाल्टिक देशों में हलचल मचा दी है. वहीं, नाटो ने जवाबी कार्रवाई के तहत इन देशों में सैन्य तैनाती को और मजबूत कर दिया है.

एक तरफ रूस बेलारूस में वॉर ड्रिल कर रहा है, तो दूसरी ओर नाटो ने लिथुआनिया, लातविया, एस्टोनिया, फिनलैंड और पोलैंड में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है. यहां तक कि अमेरिका अब दो नए फ्रंट पर परमाणु हथियारों की तैनाती की तैयारी में है, जिनकी लोकेशन फिलहाल टॉप सीक्रेट रखी गई है.

क्या बाल्टिक देश बनेंगे अगला युद्ध का मैदान?

यूक्रेन में रूस की आक्रामकता को देखकर यह कयास लगाया जा रहा है कि पुतिन अगला कदम बाल्टिक देशों की ओर बढ़ा सकते हैं. खासतौर पर लिथुआनिया, जो रूस के कैलिनिनग्राद एटमी बेस से बिल्कुल सटा हुआ है. यही वजह है कि नाटो ने इस क्षेत्र में सुरक्षा का मजबूत घेरा बना दिया है.

कैलिनिनग्राद-लिथुआनिया बॉर्डर पर रूस ने पांच स्तर की सुरक्षा तैयार की है:

गहरी खाई

लैंडमाइन्स

टैंक बटालियन

एयर डिफेंस सिस्टम

पूरी तरह से तैयार रूसी सैनिक

ये सारे इंतजाम दर्शाते हैं कि रूस इस बॉर्डर को एक अभेद्य किले में बदल चुका है.

बेलारूस बना रूस की नई रणनीति का केंद्र

बेलारूस की गतिविधियों पर भी इन दिनों सबकी नजरें टिकी हुई हैं. अगले एक महीने में बेलारूस छह बड़ी वॉर ड्रिल्स करने जा रहा है, जिनमें रूस की सेनाएं भी शामिल होंगी. इस पूरे ऑपरेशन को "ZAPAD 2025" नाम दिया गया है. माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर अभ्यास बेलारूस-पोलैंड सीमा पर होंगे. रिपोर्ट्स की मानें तो इन युद्धाभ्यासों के दौरान रूस न्यूक्लियर ड्रिल भी कर सकता है.

नाटो को इस योजना की भनक लग चुकी है, और यही वजह है कि बेलारूस की सीमाओं पर भी निगरानी तेज़ कर दी गई है. सैटेलाइट से लेकर टोही विमानों तक, हर संसाधन लगाया जा रहा है ताकि रूस की हर हलचल पर नजर रखी जा सके.

राजनीतिक अस्थिरता का हथियार?

खुफिया सूत्रों के अनुसार, नाटो बेलारूस में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर सकता है. इसके लिए लुकाशेंको सरकार के विरोधियों को एक्टिव किया जा रहा है, जिससे बेलारूस में अंदरूनी खलबली मचाई जा सके और रूस की रणनीति को कमजोर किया जा सके.

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