मुस्लिम देशों में हथियारों की खरीद को लेकर क्यों मची होड़? फाइटर जेट्स और मिसाइल सिस्टम्स की मांग में बढ़ोत्तरी

Arms Race In Muslim Countries: एशिया और मध्य पूर्व के कई मुस्लिम देशों में अचानक हथियारों की खरीदारी में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. तुर्की, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), पाकिस्तान, इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे देश आधुनिक फाइटर जेट्स, मिसाइल सिस्टम्स और ड्रोन तकनीक पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं. 

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Arms Race In Muslim Countries: एशिया और मध्य पूर्व के कई मुस्लिम देशों में अचानक हथियारों की खरीदारी में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. तुर्की, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), पाकिस्तान, इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे देश आधुनिक फाइटर जेट्स, मिसाइल सिस्टम्स और ड्रोन तकनीक पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं. 

यह दौड़ सिर्फ सैन्य आधुनिकीकरण (Military Modernization) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई भू-राजनीतिक कारण हैं, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव, अमेरिका-चीन की टकराहट, और हाल में कतर पर हुए हमलों ने इस क्षेत्र में असुरक्षा की भावना को गहरा दिया है.

तुर्की की नजर यूरोफाइटर जेट्स पर

तुर्की, नाटो का एकमात्र मुस्लिम बहुल देश, इन दिनों अपनी एयरफोर्स को फिर से मजबूत करने में जुटा है. राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने पुष्टि की है कि देश यूरोफाइटर टाइफून जेट्स खरीदने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. कतर और ओमान के साथ बातचीत अंतिम चरण में है, जबकि ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और स्पेन के साथ पहले ही तकनीकी समझौते तय हो चुके हैं.

तुर्की की योजना 2028 तक 120 आधुनिक फाइटर जेट्स अपनी वायुसेना में शामिल करने की है—जिसमें 40 यूरोफाइटर, 40 अमेरिकी F-16 और 40 F-35 विमान शामिल हैं. हालांकि, 2019 में रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने पर अमेरिका ने F-35 की सप्लाई रोक दी थी. अब दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू हो चुकी है.

क्यों बढ़ी जरूरत:

तुर्की को सीरिया और इराक की सीमा पर सक्रिय ISIS और कुर्द लड़ाकों से लगातार खतरा महसूस होता है. इसके अलावा, ग्रीस के साथ समुद्री सीमा विवाद ने उसकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं. इसीलिए एर्दोगन सरकार उन्नत लड़ाकू विमानों और हथियारों से सेना को मजबूत कर रही है.

सऊदी अरब की अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील

सऊदी अरब ने मई 2025 में अमेरिका के साथ 142 अरब डॉलर की रक्षा डील साइन की, जिसे अब तक की सबसे बड़ी अमेरिकी डिफेंस डील बताया गया है. इस समझौते के तहत सऊदी को F-35 फाइटर जेट्स, C-130 ट्रांसपोर्ट विमान, रडार सिस्टम, MQ-9B ड्रोन और मिसाइल डिफेंस सिस्टम मिलेंगे.

इसके अलावा, अमेरिका ने सऊदी को 1,000 AIM-120C-8 AMRAAM मिसाइलें देने की मंजूरी दी है, जो F-15SA जेट्स के साथ इंटीग्रेट की जाएंगी. इसके साथ ही सऊदी अरब 48 और यूरोफाइटर टाइफून जेट्स भी खरीद रहा है.

क्यों बढ़ी खरीदारी:

ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और यमन में हूती विद्रोहियों के ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है. 2019 में तेल संयंत्रों पर हुए हमले के बाद सऊदी को अपनी वायु सुरक्षा प्रणाली में बड़ी कमजोरियां महसूस हुईं. अब वह अमेरिका से F-35 खरीदना चाहता है, लेकिन इजराइल की आपत्ति फिलहाल बाधा बनी हुई है.

यूएई ने चुना फ्रांस का राफेल F4

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने फरवरी 2025 में फ्रांस के साथ 19 अरब डॉलर का रक्षा सौदा किया, जिसके तहत उसे 80 राफेल F4 फाइटर जेट्स मिलेंगे. यह डील उसके मध्यम अवधि की वायु रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए की गई है.

UAE एयर फोर्स कमांडर मेजर जनरल इब्राहिम नासिर अल अलावी के अनुसार, राफेल जेट्स और अमेरिकी F-35 एक-दूसरे के पूरक होंगे. लेकिन अमेरिका के साथ F-35 वार्ता फिलहाल ठप है, इसलिए अबू धाबी ने फ्रांस की ओर रुख किया है.

क्यों जरूरी है:

ईरान के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम और साउथ चाइना सी में चीन-अमेरिका के बीच तनाव के बीच UAE अपने रक्षा सिस्टम को आधुनिक बनाना चाहता है. इसके अलावा, उसके चीन से बढ़ते रिश्तों ने अमेरिका को भी सतर्क कर दिया है.

पाकिस्तान की अमेरिकी मिसाइल डील

पाकिस्तान ने अमेरिका से 2.5 अरब डॉलर के समझौते के तहत Raytheon की AMRAAM एयर-टू-एयर मिसाइल्स खरीदने का करार किया है. यह मिसाइलें उसके F-16 जेट्स के साथ जोड़ी जाएंगी.

जुलाई 2025 में पाकिस्तान एयरफोर्स चीफ एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की थी. ट्रंप प्रशासन ने भी इस दौरान भारत-पाकिस्तान तनाव कम करने की दिशा में बातचीत की थी.

क्यों बढ़ रही तैयारी:

पाकिस्तान पहले से चीन के J-10CE जेट्स का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उन्हें कमज़ोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा. अब अमेरिका से मिसाइलें लेकर पाकिस्तान अपनी एयर डिफेंस को मजबूत करना चाहता है, ताकि भारत और अफगानिस्तान दोनों दिशाओं से होने वाले खतरे से निपटा जा सके.

इंडोनेशिया का चीन पर भरोसा

दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश इंडोनेशिया अक्टूबर 2025 में चीन से J-10 फाइटर जेट्स खरीदने का सौदा कर चुका है. चीन, जो अब दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बन गया है, इन जेट्स को किफायती दामों पर बेच रहा है.

क्यों जरूरी है:

दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव और फिलीपींस व वियतनाम के साथ क्षेत्रीय विवादों के कारण इंडोनेशिया अपनी वायुसेना को सुदृढ़ करना चाहता है. J-10 जेट्स आधुनिक रडार और एयर-टू-एयर मिसाइल्स से लैस हैं, जो पश्चिमी जेट्स के बराबर माने जाते हैं.

बांग्लादेश की चीन से बड़ी खरीद

बांग्लादेश ने भी चीन से 2.2 अरब डॉलर में 20 J-10CE मल्टीरोल जेट्स खरीदने का करार किया है. ये जेट्स अत्याधुनिक रडार, डिजिटल हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले सिस्टम (HMDS) और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हैं.

क्यों बढ़ी जरूरत:

बांग्लादेश अपनी पूर्वी सीमा, म्यांमार और बंगाल की खाड़ी में सुरक्षा बढ़ाने के लिए इन जेट्स को तैनात करेगा. हाल के वर्षों में समुद्री सीमा पर तनाव और आतंकी गतिविधियों में वृद्धि ने उसकी सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है.

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