राफेल- Su-57 मिलकर दोहराएंगे मिराज और Su-30 का इतिहास, भारतीय वायुसेना को मिलेगी फाइटर जेट की जोड़ी!

भारतीय वायुसेना ने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसके तहत 114 नए राफेल लड़ाकू विमान खरीदे जा सकते हैं. यह डील लगभग 22 से 25 अरब डॉलर की हो सकती है और इसे भारत के रक्षा इतिहास की सबसे बड़ी फाइटर जेट खरीद माना जा रहा है.

Rafale-Su-57 together will repeat the history of Mirage and Su-30
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना एक बार फिर वैश्विक सामरिक परिदृश्य में खुद को एक निर्णायक ताकत के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है. इस बदलाव का केंद्र बिंदु हैं दो अत्याधुनिक फाइटर जेट्स- फ्रांस का राफेल और रूस का Su-57 स्टील्थ फाइटर. आने वाले समय में ये दोनों जेट भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनने की क्षमता रखते हैं.

114 राफेल जेट्स का नया प्रस्ताव

भारतीय वायुसेना ने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसके तहत 114 नए राफेल लड़ाकू विमान खरीदे जा सकते हैं. यह डील लगभग 22 से 25 अरब डॉलर की हो सकती है और इसे भारत के रक्षा इतिहास की सबसे बड़ी फाइटर जेट खरीद माना जा रहा है. इससे पहले भारत ने फ्रांस से 36 राफेल जेट खरीदे थे, जो पहले ही ऑपरेशन सिंदूर जैसे मिशनों में अपनी घातक मारक क्षमता का प्रदर्शन कर चुके हैं.

राफेल की "ओमनी-रोल" क्षमताएं जिसमें हवा से हवा, हवा से ज़मीन और समुद्र से संबंधित लक्ष्यों पर प्रहार शामिल है, इसे एक बेहद भरोसेमंद और प्रभावशाली प्लेटफॉर्म बनाती हैं. इन 114 जेट्स के शामिल होने से भारतीय वायुसेना को छह नई स्क्वाड्रन मिल सकती हैं, जो चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों के खिलाफ भारत की रणनीतिक गहराई को काफी मजबूत करेंगी.

Su-57: भारत के लिए गेमचेंजर सौदा?

जहां एक तरफ राफेल की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर भारत की नजरें रूस के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट पर भी हैं. हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि भारत तीन से पांच स्क्वाड्रन तक Su-57 खरीदने पर विचार कर रहा है. इसके अलावा रूसी अधिकारी जल्द ही HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) के नासिक प्लांट का दौरा कर सकते हैं, यह देखने के लिए कि क्या वहां Su-57 का निर्माण या असेंबली संभव है.

रूस ने भारत को 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और यहां तक कि स्रोत कोड (source code) देने की पेशकश भी की है. यह भारत के लिए बहुत बड़ा सामरिक लाभ हो सकता है, क्योंकि इससे न केवल उत्पादन भारत में हो सकेगा, बल्कि घरेलू तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.

Su-57 बनाम AMCA

भारत पहले से ही अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्रोजेक्ट, AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) पर काम कर रहा है. लेकिन इस प्रोजेक्ट के पूरी तरह ऑपरेशनल होने में अभी कम से कम 8 से 10 साल लग सकते हैं. ऐसे में Su-57 एक ‘गैप फिलर’ की भूमिका निभा सकता है.

पूर्व वायुसेना पायलट और रक्षा विशेषज्ञ विजयेन्द्र के ठाकुर का मानना है कि Su-57 को अपनाने से भारत को तुरंत स्टील्थ क्षमताएं मिलेंगी, जिससे चीन और पाकिस्तान के पांचवीं पीढ़ी के जेट्स (जैसे J-20 और J-35A) के खिलाफ सामरिक संतुलन स्थापित किया जा सकता है.

रूस का यह प्रस्ताव भी खास ध्यान देने योग्य है कि Su-57 की तकनीक भारत के AMCA प्रोजेक्ट में भी इस्तेमाल की जा सकती है, जिससे भारत का स्वदेशी प्रोजेक्ट और मजबूत हो सकता है.

Su-57 की खूबियां और विवाद

Su-57 की शुरूआती आलोचनाएं इसके इंजन को लेकर हुई थीं. पुराने वर्जन में लगे AL-41F1 इंजन को पर्याप्त नहीं माना गया, क्योंकि वह Su-35 जैसे चौथी पीढ़ी के जेट के लिए डिज़ाइन किया गया था. इससे Su-57 की परफॉर्मेंस और स्टील्थ पर सवाल उठे. लेकिन अब रूस ने इसे एक नए इंजन "Izdeliye 30" से लैस कर दिया है, जो इसे असली मायनों में पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर बना देता है.

इसके अलावा, इस जेट की सुपरक्रूज़ क्षमता, उच्च गतिशीलता, और मल्टी-रोल डिज़ाइन इसे वायुसेना की लड़ाकू जरूरतों के लिए एकदम उपयुक्त बनाते हैं.

राफेल और Su-57: ख़तरनाक कॉम्बो

अगर राफेल और Su-57 दोनों ही भारतीय वायुसेना का हिस्सा बन जाते हैं, तो यह एक ऐसा घातक संयोजन होगा जिसकी मिसाल एशिया में कहीं नहीं मिलेगी. राफेल की बहु-भूमिका क्षमताएं और Su-57 की स्टील्थ तथा गहरे लक्ष्यों पर हमला करने की शक्ति—ये दोनों मिलकर भारत को एक बेहतरीन रणनीतिक बढ़त देंगे.

हालांकि, इस ड्यूल-कंपोजिशन में इंटीग्रेशन (समन्वय) की चुनौती भी है. फ्रांस और रूस के बीच रक्षा तकनीकों के साझाकरण को लेकर सीमाएं हैं. दोनों प्लेटफॉर्म्स को एक साझा ‘किल चेन नेटवर्क’ में जोड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन भारत का संचार, ईडब्ल्यू (Electronic Warfare) और सेंसर फ्यूजन सिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है, जिससे यह चुनौती भी हल की जा सकती है.

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