RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जून 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को यथावत रखने का फैसला किया है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी की घोषणा करते हुए बताया कि केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. इसके साथ ही मौद्रिक नीति का रुख (स्टांस) भी न्यूट्रल बनाए रखा गया है.
वर्तमान में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर कायम है. इससे पहले दिसंबर 2025 में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.50 प्रतिशत से घटाकर 5.25 प्रतिशत किया था. इसके बाद से ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
अन्य प्रमुख दरें भी जस की तस
रेपो रेट के साथ-साथ आरबीआई ने अन्य महत्वपूर्ण दरों में भी कोई संशोधन नहीं किया है. स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है. वहीं मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.50 प्रतिशत पर स्थिर बने हुए हैं.
इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल आर्थिक परिस्थितियों का आकलन करते हुए सतर्क रुख अपनाना चाहता है.
महंगाई को लेकर क्या है अनुमान?
पॉलिसी समीक्षा के बाद आरबीआई गवर्नर ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर का अनुमान 5.1 प्रतिशत रखा गया है. वहीं कोर इंफ्लेशन का अनुमान 4.7 प्रतिशत पर बनाए रखा गया है.
आरबीआई का मानना है कि वर्तमान समय में महंगाई का मूल दबाव नियंत्रित स्तर पर है, हालांकि वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है.
GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए आरबीआई ने आर्थिक विकास दर (GDP Growth) के अनुमान को घटा दिया है. पहले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत रखा गया था, लेकिन अब इसे कम कर दिया गया है.
केंद्रीय बैंक के अनुसार:
NRI और OCI निवेशकों को बड़ी राहत
आरबीआई ने अनिवासी भारतीयों (NRI) और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा की है. केंद्रीय बैंक ने ऐसे इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की सीमा बढ़ाने का फैसला किया है, जिनका कारोबार शेयर बाजार में होता है लेकिन जिनके लिए सेबी का अलग पंजीकरण आवश्यक नहीं है.
इस कदम को विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और भारतीय पूंजी बाजार में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
EMI पर क्या होगा असर?
रेपो रेट में कोई कटौती नहीं होने के कारण होम लोन, ऑटो लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज लेने वाले ग्राहकों की EMI में तत्काल कोई राहत मिलने की संभावना नहीं है. बैंकों के लिए फंडिंग लागत में कोई बदलाव नहीं होने से मौजूदा ब्याज दरें फिलहाल स्थिर रहने की उम्मीद है.
आरबीआई का यह फैसला संकेत देता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है.
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