लाल सागर में आएगी शांति? हूती विद्रोहियों के इस ऐलान से खुश होंगे इजरायल, भारत को भी होगा ये फायदा

Houthi Red Sea: लगातार दो साल तक लाल सागर को युद्धक्षेत्र बनाने वाले यमन के हूती विद्रोही अब पीछे हटते नजर आ रहे हैं. इजरायल पर मिसाइल हमलों और समुद्री व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के बाद अब हूतियों ने ऐलान किया है कि वे अपने हमले रोक देंगे. 

Red Sea Israel will be happy with this announcement of Houthi rebel India will also benefit
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Houthi Red Sea: लगातार दो साल तक लाल सागर को युद्धक्षेत्र बनाने वाले यमन के हूती विद्रोही अब पीछे हटते नजर आ रहे हैं. इजरायल पर मिसाइल हमलों और समुद्री व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के बाद अब हूतियों ने ऐलान किया है कि वे अपने हमले रोक देंगे. 

हालांकि उन्होंने साफ चेतावनी दी है, अगर गाजा में युद्धविराम टूटा तो यह विराम भी खत्म हो जाएगा. यह कदम न सिर्फ इजरायल के लिए राहत की खबर है, बल्कि भारत जैसे देशों के लिए भी आर्थिक दृष्टि से बड़ा सुकून लेकर आया है.

इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले हूती अब शांत

ईरान समर्थित हूती विद्रोही बीते कुछ वर्षों से इजरायल और पश्चिमी देशों के जहाजों पर हमले कर रहे थे. गाजा संघर्ष के दौरान वे ईरान, हिजबुल्लाह और हमास के मजबूत सहयोगी बनकर उभरे थे. हालांकि उनके हमलों से इजरायल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस वजह से वैश्विक समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था.

अमेरिका और ब्रिटेन ने भी इजरायल के समर्थन में यमन में हूती ठिकानों पर बमबारी की थी. अब हूती सेना प्रमुख मेजर जनरल यूसुफ हसन अल-मदानी ने अपने नए संदेश में सभी हमले रोकने का आदेश दिया है.

हूती सेना प्रमुख का पत्र और नीतिगत बदलाव

हूतियों के नए चीफ अल-मदानी ने हमास की अल-कस्साम ब्रिगेड को एक पत्र लिखकर सूचित किया कि लाल सागर में इजरायल और उसके सहयोगियों के जहाजों पर अब हमले नहीं किए जाएंगे. यह वही पद है जिसे पहले मेजर जनरल मोहम्मद अब्दुल करीम अल-गमारी संभाल रहे थे, जिनकी मौत इजरायली हवाई हमले में हुई थी.

अल-मदानी ने पत्र में लिखा, “अगर दुश्मन गाजा पर फिर से हमला करता है, तो हम अपने सैन्य अभियान दोबारा शुरू करेंगे और लाल सागर तथा अरब सागर में इजरायली नौवहन को रोक देंगे.” इस बयान को क्षेत्रीय शांति की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है.

लाल सागर से हटे खतरे, खुलेगा व्यापार का रास्ता

हूतियों के हमलों ने दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, लाल सागर और स्वेज नहर को लगभग पंगु बना दिया था. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, इससे मिस्र को 2024 में 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. वहीं, नौसैनिक हमलों में कम से कम नौ नाविकों की जान चली गई थी. अब इस हमले के रुकने से जहाजों के लिए रास्ता फिर से सुरक्षित हुआ है और वैश्विक व्यापार में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी खुशखबरी

हूतियों के हमलों के कारण कई शिपिंग कंपनियां लाल सागर के रास्ते की जगह अफ्रीका के चारों ओर घूमकर जाती थीं, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ गए थे. इसका सीधा असर भारत से आने-जाने वाले सामानों की कीमतों पर पड़ा.

अब लाल सागर मार्ग के फिर से खुलने से भारत के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी. न सिर्फ ट्रांसपोर्टेशन सस्ता होगा बल्कि ईंधन की खपत और डिलीवरी टाइम भी कम हो जाएगा.

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