Supreme Court stray dogs order: सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से सभी आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें शेल्टर होम्स में रखने का आदेश जारी किया गया है, लेकिन इस आदेश के बाद एक नई बहस छिड़ गई है. जहां कुछ लोग इस फैसले को नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज़ से जरूरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई पशु अधिकार कार्यकर्ता और राजनेता इसे अव्यवहारिक और खतरनाक कदम मान रहे हैं.
पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद मेनका गांधी ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया है. उन्होंने न सिर्फ इसे अव्यावहारिक बताया, बल्कि इसके दुष्परिणामों को लेकर भी चेताया. उन्होंने साफ कहा कि इतने बड़े स्तर पर शेल्टर होम बनाना न तो आर्थिक रूप से संभव है और न ही इसका कोई स्थायी समाधान है. उनके अनुसार, अगर सभी कुत्तों को सड़कों से हटा दिया गया तो दिल्ली में नई समस्याएं जन्म ले सकती हैं.
पेरिस की कहानी का हवाला देकर चेताया
मेनका गांधी ने 1880 के दशक के पेरिस का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहां की सड़कों से कुत्ते और बिल्लियों को हटा दिया गया था, तो परिणामस्वरूप शहर में चूहों की संख्या में भारी इज़ाफा हुआ. उन चूहों ने गलियों से होते हुए घरों तक दस्तक दी और यह स्थिति शहर के लिए गंभीर खतरा बन गई थी.
इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के मुताबिक, 19वीं सदी के अंत में पेरिस में रेबीज़ और अन्य बीमारियों से बचने के लिए प्रशासन ने कुत्तों को सड़कों से हटाना शुरू किया. यह कदम भले ही तत्कालीन स्वच्छता और सुरक्षा के लिहाज से सही लगा हो, लेकिन इससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ गया.
मेनका गांधी का समाधान
मेनका गांधी ने बताया कि कुत्तों को जबरन एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने से वे ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं और काटने की घटनाएं बढ़ सकती हैं. उन्होंने कोर्ट को सुझाव दिया कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान उनका विस्थापन नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर नसबंदी और टीकाकरण है. इससे न केवल उनकी संख्या नियंत्रित की जा सकती है, बल्कि इंसानों और जानवरों के बीच संतुलन भी बना रहेगा.
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