ढाका: बांग्लादेश में पिछले साल राजनीतिक अस्थिरता ने देश की स्थिरता को चुनौती दी. अगस्त 2024 में राजधानी ढाका में व्यापक प्रदर्शन और विरोध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी. इसके तुरंत बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार स्थापित की गई. हालांकि, देश में राजनीतिक अशांति और अस्थिरता बरकरार रही, और मीडिया में बार-बार सैन्य तख्तापलट और विदेशी हस्तक्षेप की अफवाहें फैलती रहीं.
हाल ही में बांग्लादेश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल ने इस घटनाक्रम के पीछे सेना और विदेशों की कथित भूमिका पर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उनके अनुसार, तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वकार उज जमां ने हसीना सरकार को हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और इसे कुछ विदेशी एजेंसियों द्वारा समर्थन मिला.
सेना प्रमुख और कथित विदेशी साजिश
कमाल ने एक पुस्तक “इंशाल्लाह बांग्लादेश: द स्टोरी ऑफ एन अनफिनिश्ड रेवोल्यूशन” में यह दावा किया है कि सेना प्रमुख जनरल वकार उज जमां विदेशी एजेंसियों, विशेषकर सीआईए के प्रभाव में थे. उनका कहना है कि वकार ने व्यक्तिगत और राजनीतिक लाभ के लिए शेख हसीना के खिलाफ कदम उठाया, और सेना की कुछ संस्थाओं या खुफिया एजेंसियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई.
कमाल का आरोप है कि यह साजिश लंबे समय से तैयार की गई थी और हसीना को सत्ता से हटाने के पीछे रणनीतिक योजना बनाई गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि सेना प्रमुख ने हसीना को धोखा दिया और यह कदम सीधे तौर पर देश के भीतर और बाहर मौजूद शक्तियों से प्रेरित था.
अमेरिका की भूमिका और रणनीतिक हित
पूर्व गृह मंत्री के अनुसार, अमेरिका के लिए बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के पीछे दो मुख्य कारण थे:
दक्षिण एशिया में स्थिर, मजबूत नेतृत्व को कमजोर करना – कमाल के अनुसार, मोदी, जिनपिंग और हसीना जैसे नेताओं के रहते विदेशी एजेंसियों को उनके हित साधने में कठिनाई होती है. कमजोर सरकारों से रणनीतिक और आर्थिक हितों को प्राप्त करना आसान होता है.
सेंट मार्टिन द्वीप का महत्व – यह द्वीप बांग्लादेश के दक्षिण में, म्यांमार के पास और बंगाल की खाड़ी में स्थित है. हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच यह स्थान रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. कमाल के अनुसार, हसीना ने अमेरिकी दबाव के बावजूद इस द्वीप को सौंपने से इंकार किया, जिससे उनकी सरकार पर दबाव बढ़ा.
आंतरिक और क्षेत्रीय सहयोग
असदुज्जमां खान कमाल ने यह भी दावा किया कि सेना प्रमुख वकार के कदमों के पीछे स्थानीय और क्षेत्रीय तत्वों का भी हाथ था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI कट्टरपंथी समूहों के साथ मिलकर घटनाओं को भड़का रही थी. इस दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा को भी ISI और कुछ स्थानीय गुटों के सहयोग से बढ़ावा दिया गया.
कमाल के अनुसार, जनरल वकार और सेना की कुछ उच्च कमान को इस बात का लाभ उठाने का अवसर मिला कि वे अपने राजनीतिक और सैन्य प्रभाव को मजबूत कर सकें.
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