Tiger Conservation in Bihar: पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने और बाघों के महत्व को रेखांकित करने के लिए मंगलवार को संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर एक प्रेरक और जीवंत कार्यक्रम का आयोजन हुआ. आयोजन की अगुवाई पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार ने की, जिसमें मंत्री से लेकर छात्र-छात्राएं तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
छात्रों की कला में दिखा जंगल का जीवंत संसार
कार्यक्रम की शुरुआत बाघ एन्क्लोजर के निरीक्षण से हुई, जिसके बाद रंग-बिरंगे पोस्टरों और ज्ञानवर्धक क्विज़ ने समां बांध दिया. पटना के 15 स्कूलों से आए लगभग 900 छात्र पिछले एक हफ्ते से प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे थे, जिनकी कलाकृतियां और उत्तर बाघों के संरक्षण के लिए उनके समर्पण को दर्शा रहे थे. पेंटिंग प्रतियोगिता में, डीपीएस, लोयोला हाई स्कूल, संत माइकल हाई स्कूल और रेडियंट इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों ने विभिन्न ग्रुप्स में टॉप स्थान हासिल किया. सांप दिवस और क्विज़ प्रतियोगिता के विजेताओं को भी प्रमाणपत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.
“बिहार में बाघों का स्वागत है”
मुख्यमंत्री प्रतिनिधि और विभागीय मंत्री डॉ. सुनील कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जानकारी दी कि बिहार जल्द ही कैमूर में एक नया टाइगर रिज़र्व स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने कहा, "पिछले 12 वर्षों में बाघों की संख्या में 8 गुना वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि बिहार की धरती बाघों के लिए फिर से सुरक्षित और उपयुक्त बन रही है." उन्होंने यह भी साझा किया कि पटना जू में अब तक 32 बाघों का जन्म हो चुका है, यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.
प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सबसे जरूरी
अपर मुख्य सचिव हरजोत कौर बम्हरा ने जंगलों पर हो रहे अतिक्रमण और मानवीय दखल को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा, "बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखना ही सच्चा संरक्षण है. हमें जंगलों की रक्षा करनी होगी, ताकि ये शेर दिल जानवर वहीं फल-फूल सकें जहां वे जन्मे हैं."
जनभागीदारी से ही बदलेगा जंगलों का भविष्य
निदेशक (पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण) अभय कुमार ने इस मौके पर कहा कि बाघों के संरक्षण में केवल सरकार की नहीं, जनता की भी बड़ी भूमिका है. उन्होंने कहा कि हर छोटी कोशिश, चाहे वह प्लास्टिक का उपयोग कम करना हो, या जंगलों में आग से बचाव बड़े परिवर्तन की नींव बन सकती है. कार्यक्रम के अंत में पटना जू के निदेशक हेमंत पाटिल ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, और अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "बाघ केवल जंगल के राजा नहीं हैं, वे पारिस्थितिकी का संतुलन भी बनाए रखते हैं. आज जो सैकड़ों बच्चे यहां आए, वही कल के बाघ संरक्षक बनेंगे."
‘बाघ ज़िंदा है!’
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस का यह आयोजन एक संदेश छोड़ गया कि जब सरकार, समाज और अगली पीढ़ी मिलकर काम करें, तो जंगल फिर से गूंज सकते हैं. बाघों की दहाड़ न सिर्फ जंगलों की गूंज है, बल्कि हमारे पर्यावरण की सेहत का प्रतीक भी है.
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