Ukraine-Russia War: अमेरिका का नया शांति प्रस्ताव फिर विवादों में, जेलेंस्की ने सिरे से ठुकराया

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने अब दुनिया को तीन से अधिक वर्षों से थाम रखा है. हजारों जानें जा चुकी हैं, लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं—लेकिन शांति की कोई साफ राह अब तक नहीं दिखी. इसी बीच अमेरिका ने एक बार फिर मध्यस्थता की कोशिश तेज की है.

Russia and Ukraine Trump warn to give land to russia over us peace proposal
Image Source: Social Media

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने अब दुनिया को तीन से अधिक वर्षों से थाम रखा है. हजारों जानें जा चुकी हैं, लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं—लेकिन शांति की कोई साफ राह अब तक नहीं दिखी. इसी बीच अमेरिका ने एक बार फिर मध्यस्थता की कोशिश तेज की है. अंतरराष्ट्रीय एजेंसी AP के अनुसार, वॉशिंगटन ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक नया शांति प्रस्ताव तैयार किया है, जिसकी शर्तों में रूस को कुछ इलाकों का नियंत्रण देने और यूक्रेन की सेना के आकार को सीमित करने जैसी बातें शामिल हैं.

इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. लेकिन सबसे बड़ा झटका अमेरिका को तब लगा जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे बिना किसी विचार के सख्ती से खारिज कर दिया.

अमेरिकी प्रयासों के बीच जेलेंस्की का सख्त रुख

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी, जिनमें सैन्य सचिव भी शामिल हैं, शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यूक्रेन पहुंचे थे. अमेरिकी अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर आधिकारिक टिप्पणी करने से बचा है, लेकिन उनका कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूरोप में स्थायी शांति स्थापित करना चाहते हैं और युद्ध से लगातार मर रहे निर्दोष लोगों को बचाना उनका पहला लक्ष्य है. लेकिन यूक्रेन का रुख बिलकुल साफ है—अपनी जमीन का कोई भी हिस्सा रूस को सौंपना स्वीकार्य नहीं. इसी वजह से जेलेंस्की ने इस मसौदे को पहले ही ठुकरा दिया है.

अमेरिका और रूस—दोनों के बयान क्या कह रहे हैं?

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वॉशिंगटन एक “स्थायी शांति समझौते” पर विचार कर रहा है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी. उनके अनुसार, दोनों देशों—रूस और यूक्रेन—को कुछ कठिन लेकिन जरूरी समझौतों के लिए तैयार होना होगा. इसके विपरीत, रूस की प्रतिक्रिया इससे बिल्कुल अलग है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने साफ कहा कि यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका से किसी स्तर पर गंभीर बातचीत नहीं हो रही है. कुछ संपर्क जरूर हुए हैं, लेकिन उन्हें वास्तविक बातचीत नहीं माना जा सकता.

यूरोप ने भी स्पष्ट किया अपना रुख

अमेरिका के इस प्रस्ताव के बीच यूरोपीय देशों ने भी अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि यूक्रेन से जुड़े किसी भी समाधान में यूरोप को बाहर नहीं रखा जा सकता. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने कहा कि “यदि किसी भी शांति योजना को सफल होना है, तो इसमें यूक्रेन और यूरोप दोनों की सहमति होना अनिवार्य है. हमें इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए.”यानी अब युद्ध को रोकने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशें केवल अमेरिका या रूस तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि यूरोप भी इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी चाहता है.

क्या यह शांति प्रस्ताव कोई मोड़ ला सकता है?

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव मुश्किल परिस्थितियों में आया है.यूक्रेन अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं.रूस अपने कब्जे वाले क्षेत्रों को छोड़ना नहीं चाहता.अमेरिका युद्ध से थकी यूरोपीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करना चाहता है.यूरोप चाहता है कि कोई भी निर्णय उसकी सुरक्षा नीति को प्रभावित न करे.इन विपरीत परिस्थितियों में यह स्पष्ट है कि शांति के रास्ते अभी भी मुश्किल और उलझे हुए हैं.

यह भी पढ़ें: चीन करेगा गजब कारनामा, बना रहा दुनिया का पहला तैरने वाला आइलैंड, न्यूक्लियर अटैक भी होगा बेअसर