Russia and Ukraine War: पिछले काफी समय से रूस और यूक्रेन युद्ध की आग में जल रहे हैं. दोनों ही देश बराबरी से एक दूसरे को जवाब देते नजर आ रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कई बार कोशिशें की इस युद्ध को शांत करवा दिया जाए. लेकिन शायद उनके ये प्रयास काम नहीं आए.
इसी क्रम में ट्रंप और पुतिन की मुलाकात भी होने वाली थी. जिसे कुछ समय के लिए ही लेकिन टाल दिया गया है. अमेरिका का इस पर कहना है कि रूस है कि मानने को तैयार नहीं. ट्रंप भी ऐसी कोई मीटिंग नहीं करना चाहते जिससे कोई निष्कर्ष न निकलकर आए. इसलिए उन्होंने इस मीटिंग को बेकार तक करार कर दिया.
रूस ने बरसा दी मिसाइलें
उधर हालात युद्ध रुकवाने के थे. उम्मीदें टिकी थी कि युद्ध रुकेगा, लेकिन ऐसा हो न सका. ताजा जानकारी के अनुसार रूस ने एक बार फिर से यूक्रेन पर मिसाइलें और ड्रोन से हमला कर दिया. ये सब तब हुआ जब दोनों पक्षों की ओर से ऐसी जानकारी आ रही थी कि सीजफायर होने वाला है. लेकिन ऐसा हुआ नहीं और कीव को आग की लपटों में झोंकने को यूक्रेन तैयार हो गया. पूरे शहर में हमले का आतंक फैल गया है.
कीव में मलबे से उठी लपटें, बच्चों की मौत ने झकझोरा देश
यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक, रूस के रातभर चले हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हुई है, जिनमें दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं. कीव की सैन्य प्रशासन प्रमुख तिमुर त्काचेन्को ने बताया कि मिसाइलों और ड्रोन के टुकड़ों से कई इमारतों में आग लग गई और शहर के आधे जिलों में आग फैल गई. कीव के मेयर विटाली क्लिच्को ने बताया कि डनिप्रोव्स्की जिले की एक ऊंची इमारत में आग से दस लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें एक बच्चा भी था. घायल पांच लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सबसे दर्दनाक दृश्य डेस्नियान्स्की और डार्नित्स्की जिलों में देखने को मिले, जहां आग ने पूरे आवासीय इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया. जबकि पेचर्स्क जिले में स्थित ऐतिहासिक लावरा मठ, जो यूक्रेन की आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है, उसके आसपास भी धमाकों की आवाजें गूंजीं.
जेलेंस्की सरकार ने उठाई रूस के खिलाफ सख्त कदमों की मांग
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के मुख्य सचिव एंड्री यरमाक ने अमेरिका और उसके सहयोगियों से रूस पर और सख्त कार्रवाई की अपील की है. उन्होंने अपने टेलीग्राम पोस्ट में लिखा कि यूक्रेन ने युद्धविराम के प्रस्ताव को बहुत पहले ही स्वीकार कर लिया था, लेकिन रूस लगातार हत्या और विनाश की कोशिशें कर रहा है. इसका मतलब साफ है कि मौजूदा प्रतिबंध और कदम पर्याप्त नहीं हैं. दुनिया को मिलकर पुतिन को रोकने के लिए और मजबूत कदम उठाने होंगे.
रूस के निशाने पर फिर से एनर्जी प्लांट्स
रूसी हमलों का बड़ा लक्ष्य एक बार फिर यूक्रेन की ऊर्जा सुविधाएं रहीं. यूक्रेन की ऊर्जा मंत्री स्वितलाना ह्रिंचुक ने बताया कि पूरे देश में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार हमले हुए, जिससे कई इलाकों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई. ऊर्जा मंत्रालय ने जानकारी दी कि कीव समेत देश के कई हिस्सों में इमरजेंसी पावर कट करना पड़ा है. यह पहली बार नहीं है जब रूस ने यूक्रेन की ऊर्जा प्रणालियों को निशाना बनाया हो फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से रूस बार-बार बिजली संयंत्रों और ग्रिडों को टारगेट करता आ रहा है. रूस की दलील है कि ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना “युद्ध के नियमों के अंतर्गत वैध” है, जबकि यूक्रेन का कहना है कि यह हमला उसके नागरिकों के जीवन पर सीधा प्रहार है.
ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल
अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक अब सवाल उठा रहे हैं कि ट्रंप की “डीलमेकर” छवि इस संकट में कितनी कारगर है. अमेरिकी प्रशासन ने बयान जारी करते हुए कहा कि रूस की असहयोगी नीति के चलते बैठक को स्थगित करना मजबूरी थी, क्योंकि इस समय कोई भी वार्ता युद्ध रोकने की दिशा में कारगर नहीं दिख रही. ट्रंप ने खुद कहा कि मैं कोई ऐसी मीटिंग नहीं चाहता जो सिर्फ दिखावे के लिए हो. अगर पुतिन गंभीर नहीं हैं, तो समय बर्बाद करने का कोई मतलब नहीं.
कूटनीति की डोर कमजोर, जंग की आग तेज
जहां एक ओर यूक्रेन लगातार मदद की गुहार लगा रहा है, वहीं रूस अपने रुख पर अड़ा हुआ है. पश्चिमी देशों की ओर से बढ़ते समर्थन के बावजूद, पुतिन की सेना यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने पर आमादा है. युद्ध अब सिर्फ सीमाओं की लड़ाई नहीं रहा, बल्कि यह इंसानियत, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन की जंग बन चुका है.
यह भी पढ़ें: मुनीर को सता रहा ऑपरेशन सिंदूर 2.0 का डर, फिर दी भारत को गीदड़भभकी, कहा- अगर पाकिस्तान पर हमला...