वैश्विक राजनीति के इस संवेदनशील दौर में भारत और रूस के संबंधों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का केंद्र बिंदु बना लिया है. ऐसे समय में जब अधिकांश पश्चिमी देश रूस के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए हैं, भारत का रूस के साथ जारी व्यापार और रणनीतिक सहयोग कई देशों को खटक रहा है खासतौर पर अमेरिका को.
रूस के वरिष्ठ राजनयिक रोमन बबुश्किन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि भारत और रूस के रिश्ते 'अटूट' हैं. उन्होंने भारत को रूस का “पसंदीदा रणनीतिक साझेदार” करार देते हुए इस बात पर बल दिया कि वैश्विक दबाव के बावजूद दोनों देशों का सहयोग निरंतर गहराता जा रहा है.
रूस ने भारत को बताया 'पसंदीदा साझेदार'
उन्होंने कहा, "अगर पश्चिमी देश भारत की आलोचना कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि भारत सही दिशा में कदम बढ़ा रहा है." उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस को नहीं लगता कि भारत निकट भविष्य में रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करेगा.
क्या है ‘सुदर्शन चक्र’ और क्यों है चर्चा में?
हाल की प्रेस वार्ता के दौरान जब बबुश्किन से भारत के स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम की योजना को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में जवाब देते हुए कहा, "आपका मतलब 'सुदर्शन चक्र' से है?" यह बयान तब आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की घोषणा की थी.
यह भारतीय वायु सुरक्षा प्रणाली रूसी S-400 तकनीक पर आधारित होगी और इसकी मारक क्षमता 400 किलोमीटर से अधिक हो सकती है. यह प्रणाली दुश्मन के क्रूज मिसाइल, ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल और फाइटर जेट्स को एक ही साथ कई दिशाओं से रोकने की क्षमता रखेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली अमेरिकी THAAD सिस्टम की तुलना में अधिक प्रभावशाली हो सकती है, जिसकी सीमा सिर्फ 200 किलोमीटर तक सीमित है.
‘श्रीगणेश करते हैं’: रूस की भारत के प्रति भावनात्मक अपील
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही बबुश्किन ने हिंदी भाषा में ‘श्रीगणेश करते हैं’ कहकर भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान जाहिर किया, जिसने सोशल मीडिया पर खूब वाहवाही बटोरी. यह सिर्फ एक वाक्य नहीं था, बल्कि रूस की भारत से निकटता और परंपराओं के प्रति समझ का प्रतीक भी था.
भारत-रूस व्यापार पर प्रतिबंधों का असर नहीं
पश्चिमी देशों की नाराज़गी का एक प्रमुख कारण भारत द्वारा रूस से लगातार बढ़ रही तेल खरीद भी है. अमेरिका सहित कई देश चाहते हैं कि भारत रूसी कच्चे तेल से दूरी बनाए, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है. बबुश्किन के अनुसार, "हमारे द्विपक्षीय व्यापार में 7 गुना वृद्धि हुई है. यह इस बात का प्रमाण है कि प्रतिबंधों का कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ा है." उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस और भारत की रणनीतिक साझेदारी राजनीतिक परिस्थितियों से ऊपर है और यह दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों पर आधारित है.
‘हर चुनौती में साथ खड़े हैं’
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यूक्रेन संकट को लेकर व्यक्तिगत रूप से जानकारी देना यह दर्शाता है कि भारत को रूस में कितना महत्व दिया जाता है. बबुश्किन ने कहा, “हमारी रणनीतिक साझेदारी में भरोसा है, और यही भरोसा हमें हर वैश्विक चुनौती में एक-दूसरे के साथ खड़ा रहने की शक्ति देता है.”
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