मॉस्को/बीजिंग: रूस और चीन के बीच बढ़ती ऊर्जा साझेदारी अब वैश्विक मंच पर नए तनावों को जन्म दे रही है. हाल ही में रूस ने आर्कटिक क्षेत्र से उत्पादित लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की एक और खेप चीन को भेजी है, जिसे पश्चिमी देशों द्वारा प्रतिबंधित परियोजना माना जाता है. यह खेप एक विशेष LNG टैंकर के माध्यम से चीन के दक्षिण-पश्चिमी तटीय क्षेत्र गुआंग्शी पहुंची है.
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अमेरिका ने हाल ही में रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर 50% टैरिफ लगाया है. अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका चीन के खिलाफ भी इसी तरह का कड़ा रुख अपनाएगा, जो इस समय रूस का सबसे बड़ा ऊर्जा ग्राहक बन चुका है.
150,000 घन मीटर गैस लेकर पहुंचा टैंकर
एलएसईजी (LSEG) के डेटा से यह पता चला है कि "वोस्खोद" नामक एक रूसी टैंकर चीन के तिशान बंदरगाह पर LNG पहुंचाने के बाद दक्षिण दिशा की ओर रवाना हो गया. यह टैंकर जुलाई के मध्य में रूस के आर्कटिक क्षेत्र, ग्यदान प्रायद्वीप पर स्थित एक प्रमुख LNG संयंत्र "आर्कटिक एलएनजी 2" से रवाना हुआ था. इसमें 1.5 लाख घन मीटर तरलीकृत प्राकृतिक गैस भरी हुई थी.
यह परियोजना, जिसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते पहले ही कई झटके लग चुके हैं, अब धीरे-धीरे चीन के सहयोग से आगे बढ़ती नजर आ रही है.
दूसरी बार पहुंची प्रतिबंधित परियोजना की गैस
यह खेप चीन में प्रतिबंधित परियोजना से भेजी गई दूसरी बड़ी सप्लाई है. इससे पहले, अगस्त के अंत में "आर्कटिक मुलान" नामक एक अन्य प्रतिबंधित टैंकर बेइहाई LNG टर्मिनल पर पहुंचा था. उस समय वह पहली बार था जब आर्कटिक LNG 2 से उत्पादित गैस सीधे किसी अंतिम उपभोक्ता तक पहुंची थी.
हालांकि परियोजना का उत्पादन दिसंबर 2023 में शुरू हो गया था, लेकिन सीमित संख्या में आइस-क्लास टैंकरों की उपलब्धता और यूक्रेन युद्ध के चलते लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण इसके संचालन में काफी देरी हो रही है.
पुतिन और शी की मुलाकात के बाद आई तेजी
यह ताजा LNG सप्लाई ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन का दौरा किया था. इस दौरान वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में शामिल हुए और द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के उपलक्ष्य में आयोजित परेड में भी भाग लिया. इन मुलाकातों के बाद यह सप्लाई चीन को भेजी गई, जो रूस-चीन के बीच ऊर्जा सहयोग की बढ़ती मजबूती का संकेत देती है.
रूस की प्रमुख ऊर्जा कंपनी नोवाटेक, जिसका आर्कटिक एलएनजी 2 में लगभग 60% स्वामित्व है, इस परियोजना को रूस की सबसे बड़ी LNG परियोजनाओं में से एक बनाना चाहती थी. इसका वार्षिक उत्पादन लक्ष्य करीब 19.8 मिलियन मीट्रिक टन रखा गया था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह लक्ष्य अधूरा लगता है.
रूस निकाल रहा है बड़ी मात्रा में LNG
एनर्जी ट्रैकिंग फर्म केप्लर के अनुसार, पिछले साल इस परियोजना से आठ कार्गो भेजे गए थे, जिनमें से कुछ को कोर्याक एफएसयू (फ्लोटिंग स्टोरेज यूनिट) पर उतारा गया था. इस वर्ष अब तक छह कार्गो भेजे जा चुके हैं, और इनमें से कई टैंकर अब पूर्वी समुद्री मार्ग का उपयोग कर चीन और अन्य एशियाई देशों की ओर बढ़ रहे हैं.
एलएसईजी के अनुसार, कुछ टैंकर वर्तमान में रूस के सुदूर पूर्वी हिस्से में कामचटका प्रायद्वीप के पास मौजूद हैं, जबकि एक अन्य टैंकर ताइवान और हैनान द्वीप के बीच दक्षिण चीन सागर में खड़ा है.
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