रूस की राजधानी मॉस्को इन दिनों भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सक्रिय कूटनीति और प्रभावी मौजूदगी का केंद्र बनी हुई है. शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे जयशंकर लगातार कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. कतर और मंगोलिया के प्रधानमंत्रियों से लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक हर जगह उन्होंने भारत की मजबूत विदेश नीति और स्पष्ट रुख का परिचय दिया है.
अपनी आधिकारिक बैठकों के बीच जयशंकर ने रूस में बसे भारतीय मूल के लोगों से भी मुलाकात की. इस दौरान उनकी कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वह भारतीय समुदाय के बीच बेहद आत्मीयता से घिरे हुए दिखाई दे रहे हैं. किसी तस्वीर में वे हाथ जोड़कर अभिवादन कर रहे हैं, तो किसी में मुस्कुराते हुए बातचीत कर रहे हैं. कई लोगों ने तो उनसे ऑटोग्राफ भी लिए. मॉस्को में भारतीयों की इतनी गर्मजोशी देखकर जयशंकर visibly भावुक नज़र आए. यह साफ झलकता है कि विदेश में रहने वाले भारतीय उनके लिए मात्र प्रवासी नहीं, बल्कि ‘अपना परिवार’ हैं.
आतंकवाद पर जयशंकर का सख्त संदेश
अपनी पूरी यात्रा के दौरान जयशंकर ने आतंकवाद को लेकर भारत की स्पष्ट और अडिग नीति दोहराई. सबसे तीखा संदेश उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार की मौजूदगी में दिया, जब उन्होंने साफ कहा आतंकवाद पर कोई झूठ, कोई छुपाव या बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा. जो आतंकवाद को समर्थन देता है, उसे भी छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है. जयशंकर ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने भी वैश्विक आतंकवाद की चुनौती पर अपनी चिंताएं साझा कीं और इस मुद्दे पर रूस–भारत सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बातचीत की.
Nice to interact with members of the Indian community and friends of India in Moscow.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) November 19, 2025
🇮🇳 🇷🇺 pic.twitter.com/VmWA9cgMsf
कूटनीति के मंच पर भारत की मजबूत आवाज
SCO बैठक में जयशंकर की मौजूदगी, उनकी बेबाक टिप्पणियां और कई देशों के शीर्ष नेताओं के साथ लगातार संवाद यह दर्शाता है कि भारत आज विश्व मंच पर कितनी निर्णायक भूमिका निभा रहा है. मॉस्को यात्रा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय विदेश नीति सिर्फ कागजी बयान नहीं, बल्कि स्पष्ट, दृढ़ और परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण पर आधारित है.
भारत–रूस संबंधों में नई ऊर्जा
पुतिन के साथ मुलाकात और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग पर हुई चर्चाओं ने भारत–रूस साझेदारी को नई गति देने का काम किया. ऊर्जा, रक्षा और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हुई बातचीत निकट भविष्य में महत्वपूर्ण परिणाम ला सकती है.
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