MIG-21, Su-30MKI, Su-57... रूस ने HAL को दिया बड़ा ऑफर, भारत में नए फाइटर जेट बनाने की हो रही तैयारी

भारत और रूस के बीच दशकों से चला आ रहा रक्षा सहयोग अब एक नए मुकाम की ओर बढ़ रहा है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने संकेत दिए हैं कि वह रूस के साथ मिलकर एक नया अत्याधुनिक फाइटर जेट विकसित करने को तैयार है.

Russia offers HAL to make fighter jets in India
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली/मॉस्को: भारत और रूस के बीच दशकों से चला आ रहा रक्षा सहयोग अब एक नए मुकाम की ओर बढ़ रहा है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने संकेत दिए हैं कि वह रूस के साथ मिलकर एक नया अत्याधुनिक फाइटर जेट विकसित करने को तैयार है. यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारत अपनी वायु शक्ति को मजबूत करने के लिए आधुनिक प्लेटफॉर्म की तलाश में है.

भारत और रूस (पूर्व में सोवियत संघ) के बीच रक्षा सहयोग कोई नया विषय नहीं है. 1960 के दशक से यह साझेदारी चली आ रही है, जब भारत ने मिग-21 जैसे सुपरसोनिक फाइटर जेट्स का निर्माण रूस की तकनीक से शुरू किया था. इसके बाद इस सहयोग ने और मजबूती पकड़ी, जब Su-30MKI जैसे बहु-भूमिका लड़ाकू विमान को भारत में HAL के संयंत्रों में असेंबल और विकसित किया गया.

Su-30MKI भारतीय वायुसेना की रीढ़

आज भी Su-30MKI भारतीय वायुसेना की रीढ़ है. 1990 के दशक में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अब तक 270 से अधिक विमानों के निर्माण के साथ एक बड़ी सफलता बन चुका है. HAL फिलहाल नासिक स्थित अपने संयंत्र में 15 और Su-30MKI बना रहा है, जिनकी डिलिवरी 2026 तक की जाएगी. इनमें 60% से अधिक कल-पुर्जे देश में ही तैयार किए जा रहे हैं जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल की दिशा में एक बड़ा कदम है.

HAL और रूस: भविष्य की साझेदारी

रूसी समाचार एजेंसी TASS को दिए गए बयान में HAL के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने कहा कि कंपनी रूस के साथ मिलकर भविष्य के फाइटर जेट्स पर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह सहयोग Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर प्लेटफॉर्म तक जा सकता है.

HAL प्रतिनिधि ने कहा, "हम रूसियों के साथ मिलकर काम करने में पूरी तरह सहज हैं. वर्षों से दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, खासतौर पर मिग और सुखोई जैसे प्रोजेक्ट्स में, काफी सफल रहा है. हम इस विरासत को अगली पीढ़ी के रक्षा प्लेटफॉर्म्स में भी आगे बढ़ाना चाहते हैं."

क्यों जरूरी है यह साझेदारी?

1. भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन की कमी

भारतीय वायुसेना के पास आज 30-32 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं, जबकि न्यूनतम जरूरत 42 स्क्वाड्रन की मानी जाती है. ऐसे में नए फाइटर जेट्स की जरूरत बेहद जरूरी हो जाती है.

2. पाकिस्तान और चीन की दोहरी चुनौती

पूर्वी सीमा पर चीन और पश्चिम में पाकिस्तान, दोनों से भारत को सुरक्षा खतरे हैं. चीन अपने J-20 जैसे फिफ्थ जनरेशन फाइटर और एयर डिफेंस सिस्टम में तेजी से निवेश कर रहा है. पाकिस्तान को चीन से JF-17 जैसे जेट मिल रहे हैं. ऐसे में भारत को भी अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है.

3. स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता

HAL के साथ इस साझेदारी से भारत न सिर्फ तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा, बल्कि देश में रोजगार और रक्षा निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा.

क्या Su-57 का विकल्प हो सकता है?

Su-57 रूस का फिफ्थ जनरेशन स्टील्थ फाइटर है, जो आधुनिक एवियोनिक्स, स्टील्थ डिज़ाइन और सुपरक्रूज़ जैसी क्षमताओं से लैस है. भारत इससे पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोजेक्ट में साझेदार था, जो बाद में तकनीकी मतभेदों के कारण ठप पड़ गया था.

हालांकि अब HAL की ओर से सकारात्मक संकेत मिलने के बाद, यह उम्मीद बढ़ गई है कि भारत फिर से Su-57 या इसी तरह के प्लेटफॉर्म को भारतीय जरूरतों के अनुसार कस्टमाइज कर रूस के साथ मिलकर विकसित कर सकता है.

सुपर सुखोई: मौजूदा बेड़े का आधुनिकीकरण

HAL मौजूदा Su-30MKI फ्लीट के लिए भी एक बड़े अपग्रेड प्रोग्राम पर काम कर रहा है, जिसे ‘सुपर सुखोई’ नाम दिया गया है. इसमें नया AESA रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, आधुनिक हथियार और उन्नत एवियोनिक्स शामिल हैं.

यह अपग्रेड भारतीय वायुसेना को अगले एक दशक तक Su-30MKI को फोर्स मल्टीप्लायर बनाए रखने में मदद करेगा.

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