ब्रह्मोस की ओनिक्स मिसाइल का हुआ सफल परीक्षण, समुद्र से उड़ा सकता दुश्मनों के होश; कांप रहा अमेरिका!

रूस ने शनिवार को अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली ओनिक्स (P-800 Oniks) के अपग्रेडेड संस्करण का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण प्रशांत बेड़े द्वारा कुरील द्वीप समूह के परमुशीर द्वीप से करीब 350 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य पर किया गया.

Russia Test Oniks Cruise Missile similar like brahmos know its power
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रूस ने शनिवार को अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली ओनिक्स (P-800 Oniks) के अपग्रेडेड संस्करण का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण प्रशांत बेड़े द्वारा कुरील द्वीप समूह के परमुशीर द्वीप से करीब 350 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य पर किया गया. परीक्षण में बैस्टियन मिसाइल सिस्टम का उपयोग किया गया, जो रूस की तटीय रक्षा प्रणाली का एक अहम हिस्सा है.

इस परीक्षण ने रूस के मिसाइल सिस्टम की क्षमता को न केवल एक बार फिर साबित किया है, बल्कि भारत के लिए भी रणनीतिक तौर पर यह खबर बेहद अहम मानी जा रही है.

ब्रह्मोस की 'बहन' है ओनिक्स

भारत और रूस की संयुक्त परियोजना से बनी ब्रह्मोस मिसाइल, दरअसल ओनिक्स मिसाइल पर आधारित है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ओनिक्स ब्रह्मोस की ‘सिस्टर मिसाइल’ है. ब्रह्मोस की तरह, ओनिक्स भी भूमि, समुद्र, पनडुब्बी और वायु से दागी जा सकती है और इसकी रफ्तार इसे बेहद घातक बनाती है.भारत ने हाल के वर्षों में ब्रह्मोस की विस्तारित रेंज (ईआर) को भी विकसित किया है, जिसकी क्षमता अब 450 किलोमीटर तक पहुंच गई है. इसकी तुलना में ओनिक्स में हुआ यह अपग्रेड भारत के लिए तकनीकी और सामरिक सीख का विषय बन सकता है.

यूक्रेन युद्ध में बदल सकती है रणनीति

रूस ने अब तक यूक्रेन के खिलाफ प्रमुख रूप से Kh-101 (हवा से दागी जाने वाली) और Kalibr (समुद्र से दागी जाने वाली) मिसाइलों का उपयोग किया है. ओनिक्स का उपयोग अब तक बहुत सीमित रहा है लेकिन नए परीक्षण से संकेत मिलते हैं कि रूस भविष्य में ओनिक्स को युद्ध में अधिक सक्रिय रूप से शामिल कर सकता है, खासतौर से यदि लंबी दूरी की, सटीक और सुपरसोनिक क्षमताओं की जरूरत बढ़े. कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, ओनिक्स अपनी तेज रफ्तार और समुद्री लक्ष्यों पर प्रहार करने की क्षमता के कारण किंजल हाइपरसोनिक मिसाइल के बाद सबसे प्रभावी हथियार मानी जा सकती है. हालांकि युद्ध क्षेत्र में इसकी वास्तविक प्रभावशीलता अभी प्रमाणित होनी बाकी है.

भारत के लिए रणनीतिक मायने

ओनिक्स का यह परीक्षण भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है. जहां एक ओर यह ब्रह्मोस के तकनीकी विकास में मददगार साबित हो सकता है, वहीं दूसरी ओर यह नॉन-कॉन्टैक्ट, स्टैंड-ऑफ वारफेयर की अवधारणा को और मजबूत करता है. ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें दुश्मन के कमांड सेंटर, रसद सप्लाई पॉइंट्स, और रेडार बेस को निशाना बनाने में बेहद कारगर हो सकती हैं — बशर्ते इन्हें सटीक टारगेटिंग और निगरानी क्षमता के साथ जोड़ा जाए.

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