जेलेंस्की ने रखी ऐसी मांगें, जिसके लिए कभी तैयार नहीं होंगे पुतिन... कैसे होगा रूस-यूक्रेन सीजफायर?

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं.

Russia Ukraine War Putin will not agree to Zelensky demands
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. अमेरिका और रूस के बीच लगातार शांति समझौते पर बातचीत चल रही है, वहीं यूक्रेन अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र शांति मसौदा तैयार कर रहा है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हाल ही में कहा कि वे यूरोपीय देशों के साथ तैयार किए गए संशोधित दस्तावेज को अमेरिका को जल्द सौंपेंगे. यह साफ संकेत है कि वे अमेरिका द्वारा पहले पेश किए गए मसौदे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं.

जेलेंस्की पर अमेरिका का दबाव

वॉशिंगटन की ओर से कीव पर तेजी से समझौता करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि जल्द से जल्द युद्ध को समाप्त करना आवश्यक है, लेकिन यूक्रेन पिछले महीने प्रस्तुत अमेरिका समर्थित मसौदे से असहमत है. यूक्रेन का मानना है कि यह मसौदा रूस को अधिक फायदा पहुंचा सकता है और देश की संप्रभुता पर प्रभाव डाल सकता है.

जेलेंस्की और उनके यूरोपीय सहयोगियों का मकसद है कि शांति योजना में यूक्रेन की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित हो. इसके लिए यूक्रेन ने एक विस्तृत 20-सूत्रीय शांति प्रस्ताव तैयार किया है, जो तीन मुख्य खंडों में बंटा हुआ है:

  • मुख्य शांति ढांचा
  • दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी
  • युद्ध-बाद आर्थिक पुनर्निर्माण योजना

डिमिलिट्राइजेशन और सुरक्षा उपाय

जेलेंस्की की योजना में एक बड़े डिमिलिट्राइजेशन जोन की बात शामिल है. इसके तहत युद्धविराम रेखा के पूरे हिस्से, डोनेत्स्क से लेकर खेरसॉन तक, एक ऐसा क्षेत्र बनाया जाएगा जहां भारी हथियार तैनात नहीं किए जाएंगे. यह क्षेत्र दोनों पक्षों के लिए एक सुरक्षा बफर का काम करेगा.

सीमा विवाद और विवादित क्षेत्रों के समाधान के लिए यूक्रेन ने कोरिया-स्टाइल मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है. इसमें स्थायी विभाजन रेखा तय होगी, और विवादित क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति बाद में तय होगी. इसके अलावा, जापोरिझ्झिया परमाणु संयंत्र को रूस के नियंत्रण में नहीं रहने दिया जाएगा और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका संभाल सकता है.

यूक्रेन की NATO की सदस्यता की मांग

योजना में यूरोपीय संघ में यूक्रेन की सदस्यता 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों पर यह दबाव डाला जाएगा कि वे वेटो हटाएं और प्रक्रिया को तेज़ करें. सदस्यता मिलने से यूक्रेन में व्यापार, निवेश और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण बढ़ने की उम्मीद जताई गई है.

यूक्रेन की ओर से अमेरिका से NATO की Article 5 जैसी सुरक्षा गारंटी भी मांगी गई है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिस्थिति में यूक्रेन की संप्रभुता रूस के वीटो के प्रभाव में न आए.

सेना और वित्तीय उपाय

शांति मसौदे में यूक्रेन की सेना की सीमा बढ़ाने का भी प्रस्ताव है. कुछ सुझावों के मुताबिक, सेना की सीमा 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख की जा सकती है. हालांकि, यूक्रेन ने किसी भी औपचारिक सीमा को मानने से इनकार कर दिया है.

आर्थिक पुनर्निर्माण योजना में रूस की जमी हुई संपत्तियों का उपयोग यूक्रेन के पुनर्निर्माण में करने का प्रस्ताव है. ट्रंप प्रशासन का सुझाव है कि इसमें लगभग 100 अरब डॉलर की संपत्तियों का उपयोग किया जा सकता है. इसके अलावा अमेरिका ब्लैकरॉक और वर्ल्ड बैंक के सहयोग से यूक्रेनियन डेवलपमेंट फंड बनाया जाएगा, जिसमें 400 अरब डॉलर तक का निवेश संभव है. इस योजना में रूस के लिए भी बड़े निवेश पैकेज बनाने का विचार है.

पुतिन के लिए असंभव मांगें

यूक्रेन की शांति योजना में शामिल अधिकांश प्रस्ताव रूस के लिए स्वीकार्य नहीं होंगे. डिमिलिट्राइजेशन जोन, सुरक्षा गारंटी, NATO-स्टाइल सुरक्षा उपाय और आर्थिक नियंत्रण जैसे प्रावधान पुतिन सरकार के लिए अनस्वीकार्य हैं. जेलेंस्की की यह रणनीति रूस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डालने और समय खरीदने की दिशा में की गई है.

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