मास्को: भारत और रूस के मजबूत रिश्ते अब एक बार फिर दुनिया की नजरों में हैं. अमेरिका की ओर से लगाए गए 50% टैरिफ के दबाव को जहां भारत ने नजरअंदाज किया, वहीं अब रूस ने भारत को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सीधे तौर पर आदेश जारी किया है कि भारत को ट्रंप टैरिफ के चलते किसी भी प्रकार की वाणिज्यिक हानि न हो.
दरअसल, अमेरिका की रणनीति यह थी कि भारी टैरिफ लगाकर भारत पर दबाव डाला जाए ताकि वह रूस से कच्चे तेल की खरीदारी कम या बंद कर दे. अमेरिका को उम्मीद थी कि इससे रूस की अर्थव्यवस्था पर चोट लगेगी और यूक्रेन युद्ध में रूस की स्थिति कमजोर हो जाएगी. मगर हुआ ठीक इसका उलटा. भारत ने अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज करते हुए रूस से तेल आयात जारी रखा, और अब रूस ने भी भरोसे का बदला भरोसे से देने की घोषणा की है.
भारत को टैरिफ से नहीं होगा नुकसान- पुतिन
गुरुवार को साउथ रूस के काला सागर तट पर स्थित रिसॉर्ट में आयोजित वल्दाई डिस्कशन क्लब में बोलते हुए पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस और भारत के बीच व्यापार संतुलन सुधारने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे.
पुतिन ने कहा कि भारत ने अमेरिका के भारी दबाव के बावजूद रूस के साथ व्यापारिक रिश्तों को कमजोर नहीं होने दिया, खासकर ऊर्जा आयात के क्षेत्र में. इसलिए अब रूस का दायित्व बनता है कि वह भारत को वित्तीय रूप से किसी प्रकार का नुकसान न होने दे.
पुतिन ने अपनी सरकार को निर्देश दिया है कि भारत के साथ व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए नए रास्ते खोजे जाएं, ताकि रूस से तेल आयात से जो वित्तीय असमानता बनी है, उसे दूसरे क्षेत्रों में संतुलित किया जा सके.
मोदी को बताया "मित्र", भारत को सराहा
राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए उन्हें अपना "मित्र और भरोसेमंद साथी" बताया. उन्होंने कहा कि भारत और रूस के रिश्तों में कभी कोई तनाव या टकराव नहीं रहा. भारत की विदेश नीति को संप्रभु, संतुलित और राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित बताते हुए पुतिन ने यह भी कहा कि भारत की सरकार अपने देश के हितों को सर्वोपरि रखती है.
पुतिन ने साफ किया कि भारत जैसे मित्र देश को भू-राजनीतिक दबावों के कारण नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और रूस इसके लिए हरसंभव उपाय करेगा.
भारत से खरीदेगा कृषि और दवा उत्पाद
भारत को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए रूस ने व्यापार का दायरा बढ़ाने की योजना बनाई है. पुतिन ने कहा कि भारत से अधिक मात्रा में कृषि उत्पादों और औषधीय वस्तुओं की खरीद की जाएगी. इससे भारत को कच्चे तेल की खरीद से बने व्यापारिक घाटे को संतुलित करने में मदद मिलेगी.
उन्होंने बताया कि इसके लिए रूसी सरकार अब ऐसे उपाय कर रही है जिससे भारत को तेल के बदले बराबर मूल्य के अन्य निर्यात का मौका दिया जा सके.
ये भी पढ़ें- अग्नि प्राइम, फाइटर जेट के बाद ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट... भारतीय वायुसेना बनेगी महाबली, क्या हुई डील?