Tu-95 बॉम्बर, Su-35, Su-30... जापान के आसमान में रूसी न्यूक्लियर प्लेन, किया शक्ति प्रदर्शन, VIDEO

पूर्वी एशिया में एक बार फिर भू-राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है. रूस और जापान के बीच तनाव उस समय और गहरा गया जब रूस ने जापान के क़रीब अपने सैन्य विमानों की लंबी उड़ान भरी.

Russian nuclear plane in the sky of Japan Tu-95 bomber Su-35 Su-30
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पूर्वी एशिया में एक बार फिर भू-राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है. रूस और जापान के बीच तनाव उस समय और गहरा गया जब रूस ने जापान के क़रीब अपने सैन्य विमानों की लंबी उड़ान भरी. यह घटनाक्रम शुक्रवार को सामने आया, जब रूसी वायुसेना के 10 सैन्य विमान करीब 11 घंटे तक जापान सागर के ऊपर उड़ते रहे. इन विमानों में तीन परमाणु क्षमता वाले बमवर्षक भी शामिल थे, जिसे जापान ने सीधी उकसावे वाली कार्रवाई बताया है.

जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी विमानों की यह गतिविधि जापान के नियंत्रण वाले इलाकों के बेहद करीब हुई. मंत्रालय का कहना है कि यह कदम न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. वहीं दूसरी ओर, रूस ने इस पूरे ऑपरेशन को एक सफल सैन्य अभ्यास करार दिया है.

11 घंटे चला रूसी सैन्य अभ्यास

अमेरिकी मैगज़ीन न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने यह उड़ान एक योजनाबद्ध अभ्यास मिशन के तहत अंजाम दी. रूसी विमानों ने जापान सागर, जिसे पूर्वी सागर भी कहा जाता है, के ऊपर लगातार 11 घंटे से अधिक समय तक गश्त की. मिशन के पूरा होने के बाद रूस के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह अभियान पूरी तरह सफल रहा और सभी विमान सुरक्षित अपने बेस पर लौट आए.

कौन-कौन से विमान थे शामिल?

जापान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रूस ने इस ऑपरेशन में तीन अलग-अलग समूहों में कुल 10 विमान तैनात किए थे. इनमें शामिल थे:

  • Tu-95MS रणनीतिक बमवर्षक (परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम)
  • Su-35S अत्याधुनिक फाइटर जेट
  • Su-30SM मल्टी-रोल लड़ाकू विमान

जापान द्वारा जारी किए गए नक्शों के अनुसार, रूसी विमान जापान के ज़मीनी क्षेत्र से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच गए थे. हालांकि, उन्होंने जापानी हवाई क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया.

जापान की कड़ी प्रतिक्रिया

जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने इस कार्रवाई को रूस की ओर से खुला शक्ति प्रदर्शन बताया. उनका कहना है कि मॉस्को का यह कदम न सिर्फ जापान बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ाता है. जापान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मामले में आगे की रणनीतिक और कूटनीतिक कार्रवाई पर विचार कर रहा है.

रूस और जापान के बीच पुराना विवाद

रूस और जापान के बीच तनाव कोई नया मुद्दा नहीं है. दोनों देशों के बीच कुरिल द्वीपसमूह के चार द्वीपों को लेकर दशकों पुराना विवाद चला आ रहा है. जापान का दावा है कि ये द्वीप उसके हैं, जबकि रूस ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से इन पर नियंत्रण बना रखा है.

ये द्वीप जापान के होक्काइडो द्वीप के उत्तर-पूर्व और रूस के कामचटका प्रायद्वीप के दक्षिण में स्थित हैं. इस विवाद की वजह से आज तक रूस और जापान के बीच औपचारिक शांति संधि भी नहीं हो पाई है.

चीन, अमेरिका और बढ़ता रणनीतिक दबाव

रूस को वैश्विक राजनीति में चीन का करीबी सहयोगी माना जाता है. वहीं जापान का दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ भी विवाद रहा है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि रूस द्वारा जापान के पास बमवर्षक विमानों की उड़ान को एक बड़े भू-राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.

इस घटनाक्रम के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि टोक्यो इस मुद्दे पर अमेरिका से संपर्क बढ़ा सकता है. जापान को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का सबसे अहम रणनीतिक साझेदार माना जाता है.

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