Tu-95MS Strategic Bomber: एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शुक्रवार को अचानक एक असामान्य सैन्य गतिविधि देखने को मिली जब रूस के परमाणु-सक्षम रणनीतिक बमवर्षक विमान Tu-95MS ने जापान सागर के ऊपर उड़ान भरी. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी RIA नोवोस्ती की रिपोर्ट के अनुसार, यह उड़ान अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में की गई थी और इसे “नियमित गश्ती मिशन” का हिस्सा बताया गया है. हालांकि, इस घटना ने एशिया के कई देशों और पश्चिमी खेमे में रणनीतिक चिंता पैदा कर दी है.
रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह मिशन रूस की लॉन्ग-रेंज एविएशन फोर्सेज (Long-Range Aviation Forces) की तत्परता और परिचालन दक्षता की नियमित जांच के तहत किया गया था. बयान में कहा गया, “Tu-95MS रणनीतिक बमवर्षक विमान ने जापान सागर के ऊपर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में निर्धारित रूट पर उड़ान भरी. मिशन पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप था.”
मंत्रालय ने आगे बताया कि उड़ान के दौरान कई चरणों में विदेशी देशों के लड़ाकू विमानों ने रूसी बमवर्षकों को ट्रैक किया और कुछ समय के लिए उनके समानांतर उड़ान भरी, लेकिन किसी भी तरह का टकराव या तनाव की स्थिति नहीं बनी.
Tu-95MS- रूस का भरोसेमंद "स्ट्रेटेजिक डिटरेंट"
Tu-95MS, जिसे नाटो कोड नाम “Bear” से जाना जाता है, रूस की रणनीतिक वायुसेना का सबसे प्रतिष्ठित और पुराना लेकिन अब भी अत्यधिक प्रभावी हथियार माना जाता है. यह विमान परमाणु और पारंपरिक दोनों प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है. इसकी अधिकतम रेंज 12,000 किलोमीटर से अधिक है, यानी यह रूस से उड़ान भरकर एशिया, यूरोप या प्रशांत महासागर के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकता है. Tu-95MS में क्रूज़ मिसाइलें और न्यूक्लियर वारहेड्स ले जाने की क्षमता होती है.
यह विमान लगातार कई घंटों तक हवा में रह सकता है, जिससे यह रूस की "स्ट्रेटेजिक डिटरेंस कैपेबिलिटी" का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है. रूस के पास फिलहाल ऐसे 50 से अधिक सक्रिय Tu-95MS विमान हैं, जिन्हें नियमित रूप से अपग्रेड किया जा रहा है ताकि ये आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और हथियार प्रणालियों के साथ संगत बने रहें.
एशिया में तनाव के बीच “रणनीतिक संदेश”?
रूस ने भले ही इसे “रूटीन मिशन” बताया हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ इसे एक प्रतीकात्मक शक्ति प्रदर्शन मान रहे हैं. इस उड़ान का समय और स्थान, जापान सागर के ऊपर, अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल के महीनों में रूस, चीन और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य समन्वय बढ़ा है.
कई रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि रूस इस मिशन के जरिए यह संकेत देना चाहता है कि वह केवल यूरोप तक सीमित नहीं, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी अपनी सैन्य उपस्थिति और प्रभाव बनाए रखे हुए है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर व्यापक आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाए हैं. ऐसे में मॉस्को अब एशिया में अपनी भूराजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, चाहे वह चीन के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास हों या फिर जापान सागर के ऊपर इस तरह की हाई-प्रोफाइल उड़ानें.
जापान और पश्चिमी देशों में चिंता
जापानी रक्षा मंत्रालय ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने रूसी बमवर्षकों की गतिविधियों पर नज़र रखी और अपने लड़ाकू विमानों को अलर्ट पर रखा. जापान के अधिकारियों ने यह भी कहा कि उड़ान अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में थी, इसलिए उसे “उल्लंघन” नहीं माना जा सकता, लेकिन इसकी टाइमिंग और दिशा “रणनीतिक रूप से संवेदनशील” है.
वहीं, पश्चिमी देशों के रक्षा विश्लेषक मानते हैं कि यह उड़ान यूक्रेन युद्ध, ताइवान संकट और एशिया में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा के बीच एक सशक्त संदेश है, कि रूस अभी भी वैश्विक रणनीतिक समीकरणों में सक्रिय खिलाड़ी बना हुआ है.
रूस की सैन्य तत्परता पर नजर
रूस पिछले कुछ वर्षों से अपने स्ट्रेटेजिक बमवर्षक बेड़े को सक्रिय रखे हुए है. हाल ही में Tu-95MS विमानों ने आर्कटिक और बाल्टिक सागर क्षेत्रों में भी कई गश्त मिशन पूरे किए हैं. इन मिशनों का मकसद रूस की लंबी दूरी की मारक क्षमता को नियमित रूप से परखना और प्रदर्शित करना है.
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