'मैं जब भी न्यूज ऑन करता हूं...' मार्को रुबियो से अपनी तारीफ सुनकर हंस पड़े एस जयशंकर, देखें वीडियो

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आम तौर पर नीतिगत चर्चा और रणनीतिक विमर्श का माहौल गंभीर होता है, लेकिन कभी-कभी ऐसे पल भी सामने आते हैं जो माहौल को हल्का कर देते हैं और मुस्कुराहटें बिखेरते हैं.

S Jaishankar laughed after hearing his praise from Marco Rubio
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- ANI

वॉशिंगटन डीसी: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आम तौर पर नीतिगत चर्चा और रणनीतिक विमर्श का माहौल गंभीर होता है, लेकिन कभी-कभी ऐसे पल भी सामने आते हैं जो माहौल को हल्का कर देते हैं और मुस्कुराहटें बिखेरते हैं. कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक में, जब अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो की एक टिप्पणी ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया.

बैठक के दौरान रुबियो ने मज़ाकिया लहजे में कहा, "ये बहुत व्यस्त व्यक्ति हैं. जब भी न्यूज ऑन करता हूं, ये किसी न किसी देश में दिखाई देते हैं!" रुबियो की इस टिप्पणी पर बैठक कक्ष में ठहाके गूंजे, और डॉ. जयशंकर भी मुस्कान नहीं रोक पाए. यह हल्का-फुल्का पल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां लोग इसे डॉ. जयशंकर के तेज़तर्रार लेकिन शांत स्वभाव की एक झलक के तौर पर देख रहे हैं.

QUAD बैठक में रणनीतिक चर्चा और सख्त संदेश

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के इस चतुर्पक्षीय समूह — QUAD — की वॉशिंगटन में हुई इस अहम बैठक का मुख्य फोकस रहा आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक रुख को और अधिक सख्त बनाना.

डॉ. जयशंकर ने बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा, "आतंकवाद के खिलाफ दुनिया को ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए. पीड़ितों और अपराधियों को समान रूप से देखना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि रणनीतिक रूप से भी खतरनाक है."

बैठक के बाद, अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में जयशंकर ने बैठक को "उत्पादक और रचनात्मक" बताया और कहा, "हमने QUAD को वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप और अधिक प्रभावशाली बनाने पर विचार किया."

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय बातचीत

QUAD बैठक के इतर, डॉ. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से द्विपक्षीय वार्ता भी की. इस बैठक में चर्चा के विषय रहे:

  • सुरक्षा सहयोग
  • व्यापारिक संबंधों का विस्तार
  • महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकें
  • ऊर्जा, कनेक्टिविटी और मोबिलिटी

इन मुद्दों पर दोनों देशों ने साझा हित और सहयोग की संभावनाओं को लेकर विचार साझा किए.

इसके अलावा, डॉ. जयशंकर ने अमेरिका के रक्षा सचिव पिट हेगसेथ से भी पेंटागन में मुलाकात की, जहाँ भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को “एक निर्णायक स्तंभ” बताया गया. यह मुलाकात खासतौर पर चीन के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करने के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

कूटनीति और आत्मीयता का समावेश

इस तरह की बैठकों में जहां रणनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा होती है, वहीं ऐसे मानवीय और विनोदी क्षण यह दर्शाते हैं कि संबंध सिर्फ औपचारिकता पर नहीं, आपसी समझ और आत्मीयता पर भी टिके होते हैं. डॉ. एस. जयशंकर की वैश्विक सक्रियता और स्पष्ट रणनीतिक सोच ने उन्हें भारत की विदेश नीति का एक प्रभावशाली चेहरा बना दिया है — और ऐसे हल्के पल उनकी व्यक्तित्व की सहजता को सामने लाते हैं.

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