पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के हफ्तों में बढ़ा सीमा तनाव अब एक राजनीतिक और सैन्य संकट में बदलता नजर आ रहा है. तालिबान शासन की ओर से की गई आक्रामक कार्रवाई और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तालिबान सरकार के साथ बातचीत की अपील की है. साथ ही उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भारत की भूमिका का संदेह जताया है, जो पहले भी पाकिस्तान की नीति का हिस्सा रहा है.
हाल ही में पाक-अफगान सीमा पर भारी गोलीबारी और संघर्ष की घटनाएं सामने आईं. इनमें खैबर-पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के सीमाई क्षेत्रों में दोनों पक्षों के सुरक्षा बल आमने-सामने आए. इसके चलते दर्जनों लोग हताहत हुए और दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया.
अफगान तालिबान के सीमा रक्षकों और पाकिस्तानी सेना के बीच कई घंटों तक गोलाबारी चली. पाकिस्तान ने इसे एकतरफा हमला बताया, वहीं तालिबान ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने पहले सीमा पार गोलाबारी की थी.
पाकिस्तान की वार्ता की पेशकश
गंभीर होते हालातों के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 16 अक्टूबर को अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में घोषणा की कि पाकिस्तान अब तालिबान सरकार से "उचित शर्तों पर" बातचीत करने को तैयार है.
उन्होंने कहा, “हम स्थायी शांति चाहते हैं. 48 घंटे के युद्धविराम के बाद अब पहल तालिबान शासन को करनी है. अगर वे गंभीर हैं, तो पाकिस्तान बातचीत के लिए तैयार है.”
शहबाज शरीफ की इस घोषणा को साफ संकेत माना जा रहा है कि पाकिस्तान अब सीमाई टकराव को टालना चाहता है और कूटनीतिक रास्ता अपनाना उसकी प्राथमिकता है.
शरीफ ने भारत पर लगाया आरोप
वार्ता की पेशकश के साथ ही शहबाज शरीफ ने एक चौंकाने वाला आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि, “तालिबान शासन ने भारत के कहने पर पाकिस्तान पर हमले किए हैं.”
इस बयान से पाकिस्तान ने अपने परंपरागत रुख को दोहराया है, जिसमें देश में होने वाली सुरक्षा चुनौतियों के लिए अक्सर भारत को जिम्मेदार ठहराया जाता है. हालांकि इस बयान के समर्थन में अब तक कोई पुख्ता सबूत या आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान घरेलू दबाव और जनता की नाराजगी को हटाने के लिए दिया गया हो सकता है.
भारत की भूमिका पर सवाल
इस विवाद के संदर्भ में एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी हाल ही में भारत दौरे पर थे. यह दौरा पाकिस्तान के लिए चिंता का कारण रहा, क्योंकि पाकिस्तान मानता है कि भारत और अफगान तालिबान के बीच बढ़ती निकटता उसके रणनीतिक हितों के लिए खतरा है.
शहबाज शरीफ के बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है कि वह भारत-अफगान रिश्तों की गर्माहट से परेशान हैं, और इसे सीमाई संघर्ष से जोड़कर पेश करना चाहते हैं.
पाकिस्तान की जवाबी रणनीति
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में यह भी बताया कि पाकिस्तान ने विदेश मंत्री इशाक डार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को काबुल भेजने का निर्णय लिया है. उनका उद्देश्य:
पाकिस्तान की कोशिश है कि सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान निकाला जाए, क्योंकि वह जानता है कि दो मोर्चों भारत और अफगान सीमा पर एक साथ तनाव झेलना उसके लिए मुश्किल है.
शहबाज सरकार पर घरेलू दबाव
तालिबान के साथ संघर्ष ने पाकिस्तानी आंतरिक राजनीति को भी झकझोर दिया है. विपक्षी दल सरकार पर कमजोरी दिखाने और सुरक्षा बलों को खतरे में डालने का आरोप लगा रहे हैं.
साथ ही, आम जनता में भी नाराजगी है कि TTP के बढ़ते हमले और सीमा पार हिंसा को रोकने में सरकार नाकाम रही है. इसीलिए शहबाज शरीफ ने बातचीत का प्रस्ताव देकर एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है कि सरकार शांति चाहती है, लेकिन आक्रामक जवाब देने में भी सक्षम है.
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