'दिल्ली क्राइम फेम'...Shefali Shah ने भेदभाव पर उठाए सवाल, कहा- चांद तारे नहीं मांग रही...

OTT की दुनिया में अपनी दमदार पहचान बना चुकीं शेफाली शाह एक बार फिर सुर्खियों में हैं. ‘दिल्ली क्राइम सीज़न 3’ ने उनका जलवा दोबारा साबित किया है, और डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी के किरदार में उनकी तीखी, प्रभावशाली एक्टिंग ने फैंस को फिर दीवाना बना दिया है. 

Shefali Shah Burst out on not sharing a thing to directors
Image Source: Social Media

OTT की दुनिया में अपनी दमदार पहचान बना चुकीं शेफाली शाह एक बार फिर सुर्खियों में हैं. ‘दिल्ली क्राइम सीज़न 3’ ने उनका जलवा दोबारा साबित किया है, और डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी के किरदार में उनकी तीखी, प्रभावशाली एक्टिंग ने फैंस को फिर दीवाना बना दिया है. 

लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी उतनी चमकदार नहीं है, जितनी स्क्रीन पर नजर आती है. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में शेफाली शाह ने फिल्म और OTT इंडस्ट्री के भीतर महिलाओं को मिलने वाले व्यवहार पर पहली बार इतनी खुलकर बात की और उनकी बातें चौंकाती भी हैं और सोचने पर भी मजबूर करती हैं.

अब जाकर बोल पा रही हूं 

शेफाली बताती हैं कि इंडस्ट्री में दो दशक से भी ज्यादा समय बिताने के बावजूद, वे अपनी बुनियादी जरूरतें मांगने में भी हिचकती थीं. 52 साल की उम्र में जाकर उनके भीतर इतना आत्मविश्वास आया है कि वे प्रोड्यूसर्स या डायरेक्टर्स से साफ कह सकें कि उन्हें क्या चाहिए.उनके शब्द बेहद मार्मिक हैं. मैं कोई चांद-तारे नहीं मांग रही. बस एक ऐसी वैनिटी वैन जिसमें अपना टॉयलेट हो, और काम के घंटे एकदम बेहिसाब न हों. इतने छोटे-छोटे हक मांगने में भी मुझे 50 साल लग गए. वो कहती हैं कि कई बार कलाकारों की मांग सुन तो ली जाती है, लेकिन फिर उसे टाल दिया जाता है—“बाद में देखते हैं”—और बात वहीं खत्म हो जाती है.

अब मैं उन प्रोजेक्ट्स में काम नहीं करूंगी जहां बेसिक सुविधाएं नहीं मिलेंगी

शेफाली शाह स्पष्ट शब्दों में कहती हैं कि जिस दौर में एक्ट्रेसेस को बिना टॉयलेट के भी घंटों काम करना पड़ता था, वह दौर उनके लिए खत्म हो चुका है. अगर मेरी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होंगी, तो मैं उस प्रोजेक्ट से खुद ही पीछे हट जाऊंगी. वे मानती हैं कि खुशकिस्मती से उन्होंने ज्यादातर संवेदनशील और सम्मानजनक टीमों के साथ काम किया है, लेकिन इंडस्ट्री में ऐसा हमेशा नहीं होता. यह भेदभाव, यह कमतर व्यवहार अभी भी कई अभिनेत्रियों के लिए रोजमर्रा की हकीकत है.

शेफाली शाह की लंबी और संघर्षों से भरी यात्रा

आज वे इंडस्ट्री की सबसे दमदार और सम्मानित अभिनेत्रियों में से एक हैं, लेकिन उनका सफर आसान नहीं था. उन्होंने 1993 में टीवी से शुरुआत की. गुजराती थिएटर में लीड एक्ट्रेस रहीं. 1995 में ‘रंगीला’ से बॉलीवुड में एंट्री की और 1998 की ‘सत्या’ ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई. ‘सत्या’ में विद्या के किरदार ने उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड दिलाया और बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला. आज OTT पर उनके प्रोजेक्ट्स, खासकर ‘दिल्ली क्राइम’, उन्हें इंटरनेशनल स्तर पर भी पहचान दिला चुके हैं. उनके नाम इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड भी है.

शेफाली शाह की यह बेबाक बातचीत सिर्फ उनके व्यक्तिगत अनुभवों का खुलासा नहीं करती, बल्कि पूरी इंडस्ट्री की सच्चाई को भी सामने लाती है. उनकी हिम्मत और स्पष्टता आज की उन सभी नौजवान एक्ट्रेसेस के लिए सीख है जो अपनी आवाज दबा देती हैं—कि सम्मान, सुविधा और सुरक्षा मांगना कोई “डिमांड” नहीं, बल्कि अधिकार है.

यह भी पढ़ेंः स्मृति मंधाना और पलाश मुच्छल की प्री-वेडिंग सेलिब्रेशन, कपल ने किया रोमांटिक डांस; VIDEO वायरल