देश की इज्‍जत ग‍िरवी रख दी... ट्रंप के पिछलग्गू बने शहबाज-मुनीर, भड़के पाकिस्तानी डिप्लोमैट सुना रहे खरी-खरी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ‘गाजा पीस बोर्ड’ पर हस्ताक्षर करना पाकिस्तान में एक राजनीतिक भूचाल ले आया है. इस कदम को लेकर पाकिस्तान में विरोध का माहौल बन चुका है, और इसे कुछ लोगों ने देश के साथ गद्दारी करार दिया है.

Shehbaz Sharif signing of the Gaza Peace Board with Trump sparks uproar in Pakistan
Image Source: Social Media

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ‘गाजा पीस बोर्ड’ पर हस्ताक्षर करना पाकिस्तान में एक राजनीतिक भूचाल ले आया है. इस कदम को लेकर पाकिस्तान में विरोध का माहौल बन चुका है, और इसे कुछ लोगों ने देश के साथ गद्दारी करार दिया है. वहीं, राजनयिक और राजनीतिक हलकों में भी इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. खासकर इस फैसले को लेकर पाकिस्तान के पूर्व और वर्तमान कूटनीतिज्ञों के बीच एक गहरी बहस छिड़ी हुई है, जिनका मानना है कि यह कदम पाकिस्तान की विदेश नीति के सिद्धांतों के खिलाफ है.

मलिहा लोधी का कड़ा विरोध

संयुक्त राष्ट्र (UN) में पाकिस्तान की पूर्व स्थायी प्रतिनिधि मलिहा लोधी ने इस फैसले पर अपनी निराशा व्यक्त की है. उन्होंने इस कदम को संयुक्त राष्ट्र की महत्ता को कम करने वाला बताया और कहा कि मलिहा लोधी ने एक्स पर लिखा, पाकिस्तान ने एक ऐसे ‘संगठन’ (बोर्ड ऑफ पीस) में शामिल होने के लिए हस्ताक्षर किए हैं, जिसे ट्रंप संयुक्त राष्ट्र (UN) के विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं. यह पहल पूरी तरह से ट्रंप के व्यक्तित्व से जुड़ी है और उनके कार्यकाल के बाद इसका कोई भविष्य नहीं है. सवाल यह है कि क्या सिद्धांतों पर टिके रहने से ज्यादा जरूरी ट्रंप को खुश करना है?”

बाबर अवान की तीखी टिप्पणी

पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता बाबर अवान ने भी इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. अवान ने कहा कि सरकार का यह फैसला फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ खुली ‘गद्दारी’ है. उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए पाकिस्तान की मौजूदा नेतृत्व ने देश के सम्मान को ताक पर रख दिया है. बाबर अवान ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “ट्रंप के बूट पॉलिश की आदत ने पाकिस्तान को कहां से कहां पहुंचा दिया है. उन्होंने कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होकर पाकिस्तान ने बेंजामिन नेतन्याहू जैसे नेताओं के साथ मंच साझा करने की सहमति दी है, जो युद्ध अपराधों के लिए पूरी दुनिया में बदनाम हैं. अवान ने इसे एक “ऐतिहासिक भूल” करार दिया है, जिसका खामियाजा पाकिस्तान की आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा.

इजरायल के साथ मंच साझा करने पर विवाद

इस पूरे विवाद का केंद्र बिंदु ‘गाजा पीस बोर्ड’ में इजरायल की मौजूदगी है. पाकिस्तान का आधिकारिक रुख हमेशा से यही रहा है कि वह तब तक इजरायल को एक मान्यता नहीं देगा, जब तक फिलिस्तीनियों को उनका हक नहीं मिल जाता. लेकिन अब पाकिस्तान ने उस बोर्ड में शामिल होने के लिए हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें इजरायल भी सदस्य है. आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान की यह दोहरी नीति और आर्थिक संकट के बीच पश्चिमी देशों से मदद की उम्मीद उसके बुनियादी सिद्धांतों से समझौता करने जैसा प्रतीत हो रहा है.

फिलिस्तीन और कश्मीर मुद्दे पर असर

यह कदम पाकिस्तान की विदेश नीति को भारी नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर मुस्लिम दुनिया और कश्मीर मुद्दे पर. पाकिस्तान हमेशा खुद को फिलिस्तीन का समर्थक और मुस्लिम उम्माह का रक्षक बताता आया है, लेकिन अब यदि वह इजरायल जैसे देशों के साथ सहयोग करता है, तो उसकी यह छवि प्रभावित हो सकती है. कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम कश्मीर पर भी उसके दावों को कमजोर कर सकता है, क्योंकि पाकिस्तान का पूरा कश्मीर मसला यूएन के प्रस्तावों पर आधारित है.

ये भी पढ़ें: पहले ट्रंप से की कानाफूसी, फिर मुनीर की ओर दिखाई उंगली... शहबाज शरीफ ने 'बोर्ड ऑफ पीस' पर किया साइन