भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने वाला है. एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से रवाना हुआ 'ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट' अब धरती की ओर लौट रहा है. इस मिशन का हिस्सा रहे भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम की सुरक्षित वापसी को लेकर न केवल अमेरिका में नासा और स्पेसX अलर्ट हैं, बल्कि भारत में भी लोगों की निगाहें आसमान की ओर टिकी हुई हैं.
अंतरिक्ष से वापसी का सफर, लेकिन मुश्किलों भरा रास्ता
इस मिशन की शुरुआत से लेकर अब तक कई तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियां सामने आईं. पहले फाल्कन-9 रॉकेट में लिक्विड ऑक्सीजन के रिसाव की खबर आई, फिर ड्रैगन कैप्सूल के कुछ सिस्टम में गड़बड़ी दर्ज की गई. इसके बाद, मौसम ने भी कई बार इस मिशन के रास्ते में रुकावटें खड़ी कीं. यही वजह है कि 2003 की कोलंबिया स्पेस शटल त्रासदी और सुनीता विलियम्स की लंबी देरी जैसी घटनाएं अब एक बार फिर ज़ेहन में ताज़ा हो गई हैं. हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि इस बार टीम सही-सलामत वापस लौटेगी.
धरती की ओर 28,000 किमी/घंटा की रफ्तार से लौट रहा है स्पेसक्राफ्ट
ड्रैगन कैप्सूल इस समय लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धरती की ओर बढ़ रहा है. जब यह पृथ्वी के वातावरण के करीब पहुंचेगा, तो इसकी स्पीड धीरे-धीरे घटाई जाएगी. कैप्सूल की हीट शील्ड को वापसी के दौरान करीब 2000 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहना पड़ता है, जिससे इसकी सुरक्षा प्रणाली की असली परीक्षा होती है.
वापसी का स्थान: अटलांटिक महासागर में 'सॉफ्ट स्प्लैशडाउन'
AXIOM-4 मिशन का कैप्सूल 'ग्रेस' अमेरिका के फ्लोरिडा तट के पास अटलांटिक महासागर में लैंड करेगा. इसे 'सॉफ्ट स्प्लैशडाउन' कहा जाता है, यानी कैप्सूल पानी में धीरे से उतरेगा. लेकिन यूरोपीयन स्पेस एजेंसी के अनुसार, वापसी के इस अंतिम चरण में तेज़ हवाएं, बारिश और समुद्री तूफान बाधा बन सकते हैं.
देश में उत्साह, परिवार और वैज्ञानिक समुदाय की निगाहें मिशन पर
शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा सिर्फ एक अंतरिक्ष मिशन नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रतीक बन चुकी है. उनके परिवार के साथ-साथ देशभर में लोगों की जुबान पर बस एक ही प्रार्थना है – “वो सुरक्षित लौटें.” वैज्ञानिक भी इस मिशन की सफलता को लेकर कड़े विश्लेषण और निगरानी में जुटे हुए हैं.
यह भी पढ़ें: ताइवान की जंग में अमेरिका अकेला! ऑस्ट्रेलिया ने किया साथ देने से इनकार, क्या चीन का सामना कर पाएंगे ट्रंप?