नवंबर से देश भर में शुरू होगा SIR, राज्य चुनावों से पहले पूरी होगी प्रक्रिया, SC ने दिया था निर्देश

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने देशभर में Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण की व्यापक तैयारी पूरी कर ली है.

SIR will start across the country from November
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नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने देशभर में Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण की व्यापक तैयारी पूरी कर ली है. आयोग ने ऐलान किया है कि यह प्रक्रिया नवंबर 2025 से शुरू होकर मार्च 2026 तक चलेगी. इसका लक्ष्य है कि 2026 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले सभी राज्यों में मतदाता सूचियां पूरी तरह सटीक और अद्यतन (updated) हो जाएं.

इस बार का पुनरीक्षण सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और विधिक मानकों का पालन करते हुए किया जाएगा. आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का मकसद केवल नए मतदाताओं को जोड़ना ही नहीं है, बल्कि दोहरे नामों को हटाना, मृत व्यक्तियों के नामों को डिलीट करना और यह सुनिश्चित करना है कि हर पंजीकृत मतदाता भारतीय नागरिक हो.

दो दशक बाद सबसे बड़ी मतदाता सूची समीक्षा

निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह लगभग 20 वर्षों में पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है. शहरीकरण, बड़े पैमाने पर लोगों का दूसरे शहरों में पलायन (migration), और नए मतदाताओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कदम बेहद आवश्यक माना जा रहा है.

2002 से 2004 के बीच हुई पिछली SIR प्रक्रिया के दौरान देश में लगभग 70 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 99.10 करोड़ के करीब पहुंच चुकी है. आयोग का अनुमान है कि इस बार लगभग 21 करोड़ मतदाताओं को अपने दस्तावेजों का सत्यापन (verification) कराना होगा.

किन राज्यों पर रहेगा विशेष फोकस

चूंकि 2026 में केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, इसलिए निर्वाचन आयोग ने इन राज्यों पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है.

आयोग ने राज्य चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नवंबर से शुरू होने वाली यह प्रक्रिया मार्च 2026 तक पूरी हो जानी चाहिए ताकि चुनावों से पहले अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जा सके.

आधार कार्ड को मिलेगा आधिकारिक दर्जा

इस बार की प्रक्रिया में आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज़ के रूप में शामिल किया गया है. इसका उद्देश्य मतदाता की पहचान और पते की पुष्टि को सरल बनाना है. साथ ही, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आधार को मतदाता पंजीकरण के लिए अनिवार्य नहीं बनाया गया है, बल्कि यह एक वैकल्पिक सत्यापन दस्तावेज़ रहेगा.

मतदाता सूची सुधार के नए मानक

निर्वाचन आयोग की योजना के अनुसार, प्रत्येक ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) को अपने क्षेत्र के मतदाताओं के घर-घर जाकर प्री-फिल्ड फॉर्म (pre-filled forms) देने का निर्देश दिया गया है.

इस प्रक्रिया के तहत:

  • हर मतदाता के नाम, पते और आयु की पुष्टि की जाएगी.
  • 31 दिसंबर 2025 तक 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है.
  • शहरी क्षेत्रों में मोबाइल ऐप और ऑनलाइन फॉर्म सबमिशन की सुविधा भी दी जाएगी ताकि युवा मतदाता आसानी से पंजीकरण करा सकें.

राज्यों में मतदाताओं की मौजूदा स्थिति

निर्वाचन आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कुछ राज्यों में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है:

  • आंध्र प्रदेश: 2003-04 में 5.5 करोड़ मतदाता थे, जो अब बढ़कर लगभग 6.6 करोड़ हो गए हैं.
  • उत्तर प्रदेश: 2003 में 11.5 करोड़ मतदाता थे, अब यह संख्या लगभग 15.9 करोड़ तक पहुंच चुकी है.
  • दिल्ली: 2008 में मतदाता संख्या 1.1 करोड़ थी, जो अब 1.5 करोड़ हो गई है.

अब तक लगभग 8 करोड़ मतदाताओं की पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि शेष राज्यों में नवंबर से यह अभियान गति पकड़ेगा.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल के एक निर्णय में निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि मतदाता सूची की शुद्धता (purity of electoral rolls) और नागरिकता सत्यापन पर कोई समझौता न हो. इसीलिए आयोग ने इस बार सभी राज्यों को यह निर्देश दिया है कि मतदाता सूचियों को डेटा-क्रॉस वेरिफिकेशन, बायोमेट्रिक मिलान और स्थानीय सत्यापन के ज़रिए दोबारा जांचा जाए.

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