एयरपोर्ट पर जवान ने MS Dhoni के लिए तोड़ा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल, उड़ाई नियमों की धज्जियां, देखें VIDEO

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका खेल नहीं बल्कि एयरपोर्ट सुरक्षा से जुड़ा एक वायरल वीडियो है.

Soldier broke security protocol for MS Dhoni at the airport
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MS Dhoni: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका खेल नहीं बल्कि एयरपोर्ट सुरक्षा से जुड़ा एक वायरल वीडियो है. सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो को रांची एयरपोर्ट का बताया जा रहा है, जहां धोनी को सुरक्षा जांच के दौरान आम यात्रियों की तुलना में अलग तरह का व्यवहार मिलता दिखाई देता है.

वीडियो में देखा जा सकता है कि धोनी अपने हाथ में घड़ी और फिटनेस डिवाइस पहने हुए सुरक्षा जांच क्षेत्र से गुजरते हैं. आमतौर पर किसी सामान्य यात्री को ऐसी स्थिति में रोका जाता है, उसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस उतारकर ट्रे में रखने को कहा जाता है और फिर दोबारा लाइन में लगना पड़ता है. लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं होता, जिससे कई लोगों के मन में सवाल खड़े हो गए हैं.

आम यात्रियों के लिए सख्ती, मशहूर लोगों के लिए ढील?

जो लोग हवाई यात्रा करते हैं, वे जानते हैं कि एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच कितनी कड़ी होती है. बेल्ट, घड़ी, मोबाइल फोन, लैपटॉप, फिटनेस बैंड और कई बार जूते तक उतारकर स्कैनर से गुजरना पड़ता है. छोटी सी चूक पर भी यात्रियों को फिर से जांच प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है. ऐसे में वायरल वीडियो ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या नियम सिर्फ आम नागरिकों के लिए हैं?

वीडियो को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मशहूर हस्तियों के लिए सुरक्षा नियमों में लचीलापन बरता जाता है. यही बात सोशल मीडिया यूजर्स को खटक रही है. कई लोगों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे वह आम व्यक्ति हो या देश का बड़ा सेलिब्रिटी.

सीआईएसएफ और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उठे सवाल

एयरपोर्ट की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जिम्मे होती है, जिनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे नियमों का सख्ती से पालन कराएं. वायरल वीडियो के बाद कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या वीआईपी संस्कृति के दबाव में सुरक्षा मानकों से समझौता किया गया. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब का है या उस समय कोई विशेष प्रोटोकॉल लागू था या नहीं.

फिर भी, इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है. कई यूजर्स का कहना है कि सुरक्षा नियम लोकप्रियता, पैसा या सामाजिक रुतबे के आधार पर नहीं बदले जाने चाहिए.

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