नोएडा में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन फ्रॉड का मामला सामने आया है, जिसमें एसटीएफ ने एक बड़े ठग गैंग का पर्दाफाश किया है. यह गैंग फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए बैंकों से लोन प्राप्त करता था और फिर फरार हो जाता था. पुलिस ने गैंग के सरगना समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. इस फ्रॉड के खुलासे से बैंकिंग सेक्टर और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जांच में कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है.
सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, पुलिस कर रही जांच
एसटीएफ ने गिरोह के सरगना सहित 8 ठगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज़ों के जरिए कई बैंकों को करोड़ों का चूना लगाया. शुरुआती जांच में यह पाया गया है कि गिरोह ने कम से कम 10 बैंकों से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी की. इन पैसों को ठगों ने बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलकर निवेश किया था. पुलिस ने अब तक 200 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी में किया गया था.
फर्जी दस्तावेज़ों का जखीरा जब्त
गिरफ्तार किए गए आरोपियों से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज़ भी बरामद किए गए हैं, जिनमें 126 पासबुक, 170 डेबिट कार्ड, 45 आधार कार्ड, 27 पैन कार्ड, 15 आईडी कार्ड, 5 वोटर आईडी कार्ड, 26 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, और 3 गाड़ियां शामिल हैं. इसके अलावा, एसटीएफ ने सैकड़ों लोगों के होम लोन और पर्सनल लोन से संबंधित दस्तावेज़ और रजिस्ट्री कागजात भी जब्त किए हैं. यह दस्तावेज़ धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए जा रहे थे, जो इस गिरोह की योजनाबद्ध धोखाधड़ी को साबित करते हैं.
गैंग का अंतरराज्यीय नेटवर्क और सहयोग
यह गिरोह केवल नोएडा तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश के कई शहरों तक फैला हुआ था. गैंग के सदस्य फर्जी प्रोफाइल बनाकर होम लोन और पर्सनल लोन प्राप्त करते थे. वे विभिन्न बिल्डरों के साथ मिलकर इन फर्जी प्रोफाइल से फंडिंग कराते थे, जिससे यह धोखाधड़ी और भी बड़े पैमाने पर फैलती चली गई.
एसटीएफ के अनुसार, गिरोह के सदस्य लोन पास होने के बाद फरार हो जाते थे, जिससे बैंकों को लाखों रुपये का नुकसान होता था. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन बिल्डरों को फंडिंग देने के पीछे किसका हाथ था और इस पूरे मामले में बैंक के कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सख्त जांच चल रही है.
अंतर-राज्यीय कनेक्शन की संभावना
पुलिस का मानना है कि इस गैंग के अंतरराज्यीय कनेक्शन हो सकते हैं, और इसलिए अब एक इंटर-स्टेट पुलिस टीम भी बनाई जा सकती है. इससे इस गिरोह के और भी अन्य सदस्यों का पता चलने की उम्मीद है, जो अभी तक पकड़े नहीं गए हैं. इस जांच में कुछ बड़े बिल्डरों, प्रॉपर्टी डीलरों और अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जो इस पूरे फ्रॉड के पीछे की असल ताकत हो सकते हैं.
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