India Taliban News In Hindi: अफगानिस्तान को लेकर एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीति में हलचल बढ़ गई है. भारत और तालिबान सरकार के बीच हालिया कूटनीतिक संवाद ने जहां भविष्य के रिश्तों के नए संकेत दिए हैं, वहीं पाकिस्तान की चिंताएं भी तेज़ कर दी हैं. रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित ‘मॉस्को फॉर्मेट’ की सातवीं बैठक के दौरान भारत के राजदूत विनय कुमार और तालिबानी विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के बीच हुई मुलाकात ने इस बहस को और तेज कर दिया है.
यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब तालिबान नेता मुत्ताकी की भारत यात्रा भी प्रस्तावित है, और खास बात ये है कि उन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति ने भारत आने की अनुमति दे दी है, पाकिस्तान की आपत्ति के बावजूद.
भारत-तालिबान मुलाकात, रणनीतिक संकेत
इस मीटिंग को सिर्फ शिष्टाचार भेंट मानना भूल होगी. तालिबान सरकार भले ही अभी भारत द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त न हो, लेकिन मौजूदा हालात और क्षेत्रीय स्थिरता के मद्देनज़र भारत अब अफगानिस्तान को लेकर अपनी कूटनीति में व्यावहारिक रुख अपना रहा है. यह मुलाकात इस बात का संकेत है कि भारत, तालिबान से संपर्क बनाए रखते हुए अपने हितों की रक्षा करना चाहता है.
बातचीत के प्रमुख मुद्दों में आतंकवाद, मानवीय सहायता, व्यापार, और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे. सूत्रों के अनुसार, भारत ने यह स्पष्ट किया है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी भारत-विरोधी गतिविधि के लिए नहीं होना चाहिए.
मॉस्को फॉर्मेट: अफगान संकट के लिए क्षेत्रीय मंच
मॉस्को फॉर्मेट की शुरुआत साल 2017 में रूस ने की थी, जिसका उद्देश्य था अफगानिस्तान में स्थिरता और समावेशी सरकार की स्थापना को समर्थन देना. इस मंच में भारत, रूस, चीन, ईरान, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देश शामिल हैं. इस बार की बैठक की अध्यक्षता रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने की.
लावरोव ने अपने संबोधन में तालिबान सरकार को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उसकी "कारगर भूमिका" के लिए सराहा. उन्होंने कहा, "काबुल सरकार बाहरी दबाव और सीमित संसाधनों के बावजूद इस्लामिक स्टेट जैसे संगठनों से निपटने में सफल रही है."
तालिबान नेता की भारत यात्रा से पहले अहम कूटनीतिक संकेत
अमीर खान मुत्ताकी की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर पहले ही पाकिस्तान ने असंतोष जाहिर किया था, लेकिन UNSC की मंजूरी ने इस यात्रा को वैध और आधिकारिक बना दिया. इस घटनाक्रम से भारत यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि वह अफगानिस्तान को लेकर किसी भी देश के दबाव में नहीं आएगा, और अपनी नीति ‘India First’ सिद्धांत पर ही आगे बढ़ाएगा.
कौन हैं विनय कुमार?
विनय कुमार फिलहाल भारत के रूस में राजदूत हैं और भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं. उनका करियर व्यापक राजनयिक अनुभव से भरा हुआ है. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद 1992 में IFS जॉइन किया था.
उन्होंने ताशकंद, ओटावा, वारसॉ, तेहरान, काठमांडू और न्यूयॉर्क जैसे रणनीतिक मिशनों में कार्य किया है. वे 2011-12 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के राजनीतिक समन्वयक भी रहे हैं. रूस जैसे देश में उनकी पोस्टिंग भारत की अफगान नीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है.
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