सूडान में मस्जिद पर हुआ ड्रोन अटैक, नमाज पढ़ने गए 43 की हुई मौत

सुबह के अँधेरे में उत्तरी दारफुर की राजधानी अल-फशर में एक मंदिर-से-मस्जिद परिवर्तित स्थल पर एक भयावह हमला हुआ है. आरएसएफ (रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़) नामक अर्धसैनिक संगठन ने ड्रोन हमले के ज़रिए नमाज़ियों पर हमला किया.

Sudan drone attack on mosque 43 people died includes children
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सुबह के अँधेरे में उत्तरी दारफुर की राजधानी अल-फशर में एक मंदिर-से-मस्जिद परिवर्तित स्थल पर एक भयावह हमला हुआ है. आरएसएफ (रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़) नामक अर्धसैनिक संगठन ने ड्रोन हमले के ज़रिए नमाज़ियों पर हमला किया. इस हमले में कम से कम 43 बेगुनाह नागरिक — बुजुर्ग, बच्चे और पुरुष— अपनी जान गंवा चुके हैं. होली वक़्त, जब लोग ख़ुदा की इबादत में मग्न थे, उसी दौरान ऐसा हमला होना मानवीयता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की सीमाओं को चुनौती देता है.

सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क के अनुसार, मलबे में दबे हुए लोगों में बच्चे और बूढ़े भी शामिल हैं. ये लोग पूरी तरह से निहत्थे और निर्दोष थे. संगठन ने इस हमले को “मानवता और धार्मिक मूल्यों का उल्लंघन” बताया है और कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून में इस तरह के हमला अपराध की श्रेणी में आता है. द रेसिसटेंस कमिटीज इन अल-फशर नामक स्थानीय निगरानी समूह ने वीडियो साझा किया है जिसमें मस्जिद के ध्वस्त हिस्से, मलबा, और शव दूर-दूर बिखरे हुए दिख रहे हैं. AP ने इस फुटेज की पुष्टि नहीं की है, फिर भी स्थानीय लोग इस घटना को साक्ष्यों के तौर पर प्रस्तुत कर रहे हैं.

संघर्ष की पृष्ठभूमि और लड़ाई की स्थिति

यह हमला उस श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें पिछले हफ्तों में आरएसएफ और सूडानी सेना के बीच अल-फशर में भारी झड़पें हुई हैं. ये झड़पें अप्रैल 2023 से लगातार तेज़ होती जा रही गृहयुद्ध की घटनाओं में एक नया पड़ाव हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक इस गृहयुद्ध में अब तक करीब 40,000 लोग मारे गए, 1.2 करोड़ से ज़्यादा लोग विस्थापित, और आपदा के कगार पर खड़े लोग बड़ी संख्या में हैं.

अंतरराष्ट्रीय चिंता और मानवीय संकट

इस हमले ने न सिर्फ सूडान की आंतरिक स्थिति को और बिगाड़ा है बल्कि विश्व समुदाय में भी गहरी चिंता पैदा कर दी है. धार्मिक स्थलों पर कहीं भी इस तरह की हिंसा करना न केवल मानवीय कानून का उल्लंघन है, बल्कि विश्व सांस्कृतिक और धार्मिक सहिष्णुता को भी चुनौती देता है. बड़ी तादाद में शरणार्थी संकट, भुखमरी, तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की संभावना भी बढ़ गई है क्योंकि संघर्ष के कारण राहत कार्यों और सेवाओं की पहुंच मुश्किल हो गई है.

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