काठमांडू: नेपाल की राजनीति ने एक ऐतिहासिक मोड़ लिया है. देश को पहली महिला कार्यकारी प्रधानमंत्री के रूप में पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के रूप में नया नेतृत्व मिल गया है. राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने शुक्रवार शाम शीतल निवास में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
सुशीला कार्की पहले ही नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने का गौरव हासिल कर चुकी हैं और अब वे नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री भी बन गई हैं. उनके नाम दो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ दर्ज हो चुकी हैं. न्यायपालिका और कार्यपालिका दोनों में शीर्ष पद संभालने वाली वह पहली नेपाली महिला हैं.
युवाओं के आंदोलन के बाद टूटी संसद
नेपाल में हाल ही में उभरे राजनीतिक संकट की जड़ें उस फैसले में थीं जब सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया. इस फैसले के खिलाफ हजारों युवा सड़कों पर उतर आए, खासकर जेनरेशन-Z प्रदर्शनकारी, जिन्होंने संसद भंग करने और नए नेतृत्व की मांग की. प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री केपी ओली ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद अंतरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई. सुशीला कार्की की सख्त और ईमानदार छवि ने उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए स्वाभाविक विकल्प बना दिया.
राष्ट्रपति ने निभाई संवैधानिक भूमिका
राष्ट्रपति पौडेल ने शुक्रवार को कई दौर की बैठकों के बाद यह स्पष्ट कर दिया कि वह संसद भंग करने और सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त करने के पक्ष में हैं. उसी शाम शीतल निवास में उन्हें शपथ दिलाकर आधिकारिक रूप से नई अंतरिम सरकार का गठन कर दिया गया.
भारत से भी है गहरा नाता
कार्की का न केवल नेपाल की न्यायपालिका में योगदान रहा है, बल्कि भारत से उनका शैक्षणिक नाता भी रहा है. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान में मास्टर्स की पढ़ाई की है. यह जुड़ाव भारत-नेपाल संबंधों के मानवीय पहलू को और मजबूत करता है.
सख्त छवि ने दिलाया नेतृत्व
पूर्व मुख्य न्यायाधीश के तौर पर सुशीला कार्की ने भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ कई प्रमुख और निर्णायक फैसले दिए थे. यही छवि उन्हें जनता और राजनीतिक ताकतों के बीच भरोसेमंद चेहरा बनाती है. उनकी नियुक्ति इस बात का संकेत है कि नेपाल अब पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर कदम बढ़ा रहा है.
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