China Condom Tax: भारत के पड़ोसी देशों में इन दिनों एक ऐसा विषय सुर्खियों में है, जो आमतौर पर चर्चा के केंद्र में नहीं रहता. मामला है कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों का. पहले पाकिस्तान और बांग्लादेश से इनकी कमी और महंगाई की खबरें सामने आईं, और अब चीन ने ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
तीन अलग-अलग देश, तीन अलग परिस्थितियां- लेकिन मुद्दा एक ही. आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि गर्भनिरोधक साधन अचानक नीति, अर्थव्यवस्था और जनसंख्या से जुड़ी बहस का केंद्र बन गए हैं?
चीन में क्या बदला 1 जनवरी 2026 से?
चीन ने साल 2026 की शुरुआत एक अहम नीतिगत बदलाव के साथ की है. 1 जनवरी 2026 से चीन में कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों पर 13 प्रतिशत वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लागू कर दिया गया है.
खास बात यह है कि पिछले करीब 30 वर्षों से इन उत्पादों पर टैक्स में छूट दी जा रही थी. अब इस छूट को खत्म कर दिया गया है. सोशल मीडिया और नीति विशेषज्ञों ने इस फैसले को अनौपचारिक रूप से “कंडोम टैक्स” कहना शुरू कर दिया है.
सरल शब्दों में समझें तो:
यही वजह है कि चीन में इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है.
कंडोम और गर्भनिरोधक पर टैक्स क्यों लगाया?
यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब चीन को अपनी तेजी से गिरती जन्मदर की चिंता सता रही है. दरअसल, चीन ने वन चाइल्ड पॉलिसी (एक-बच्चा नीति) में ढील दिए हुए अब 10 साल पूरे कर लिए हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात नहीं सुधरे.
सरकार का तर्क साफ माना जा रहा है- अगर गर्भनिरोधक साधन महंगे होंगे, तो लोग इनके इस्तेमाल से बच सकते हैं और इससे ज्यादा बच्चे पैदा करने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है. यानी टैक्स के ज़रिए जनसंख्या बढ़ाने की कोशिश.
एक-बच्चा नीति का उल्टा असर
चीन में 1980 से 2015 तक एक-बच्चा नीति सख्ती से लागू रही. इस दौरान:
शुरुआत में इस नीति से जनसंख्या वृद्धि पर लगाम लगी, लेकिन लंबे समय में इसका असर उल्टा पड़ा.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:
इसके बाद चीन ने पहले दो-बच्चा और फिर तीन-बच्चा नीति लागू की, लेकिन लोग परिवार बढ़ाने के लिए तैयार नहीं हुए.
चीन में लोग बच्चे क्यों नहीं चाहते?
विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या सिर्फ नीतियों की नहीं, बल्कि जीवन यापन की बढ़ती लागत की है.
मुख्य वजहें:
इन कारणों से युवा दंपती बच्चे पैदा करने या परिवार बढ़ाने से बच रहे हैं. अब सरकार टैक्स नीति, सब्सिडी और शिक्षा में छूट जैसे उपायों के जरिए माहौल बदलने की कोशिश कर रही है.
पाकिस्तान और बांग्लादेश में अलग संकट
जहां चीन जन्मदर बढ़ाने के लिए कंडोम और गर्भनिरोधक को महंगा कर रहा है, वहीं भारत के दो अन्य पड़ोसी देशों में स्थिति बिल्कुल उलट है.
बांग्लादेश में कंडोम की कमी का खतरा
बांग्लादेश में सरकारी एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि देश में कंडोम की गंभीर कमी हो सकती है. परिवार नियोजन विभाग के अनुसार:
यह स्थिति ऐसे देश में चिंता बढ़ा रही है, जहां जनसंख्या नियंत्रण पहले से ही एक बड़ी चुनौती है.
पाकिस्तान में IMF की शर्तों का असर
पाकिस्तान में कंडोम और गर्भनिरोधक साधनों की कीमतें IMF की शर्तों के चलते बढ़ी हैं. आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने टैक्स बढ़ाए, जिसका असर इन जरूरी उत्पादों पर भी पड़ा.
नतीजा:
पूरे घटनाक्रम से एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है:
तीनों देशों की समस्याएं अलग हैं, लेकिन गर्भनिरोधक साधन इस समय नीति और समाज के बीच बहस का केंद्र बन गए हैं.
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