बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पूर्व नेता और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का गठन कर दिया है. इस नई पार्टी का नाम रखा गया है जन शक्ति जनता दल. तेज प्रताप के इस कदम को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र एक बड़ी राजनीतिक चाल माना जा रहा है.
तेज प्रताप यादव अब तक अपने पिता लालू यादव और भाई तेजस्वी यादव की छत्रछाया में राजनीति करते आए थे, लेकिन अब वह खुद को एक स्वतंत्र नेता के तौर पर स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं. RJD से अलग होने के बाद तेज प्रताप ने काफी समय से नई पार्टी बनाने की योजना बना रखी थी. पार्टी की घोषणा पहले होनी थी, लेकिन परिस्थितियों के कारण इसे टालना पड़ा. अब चुनावी हलचल के बीच उन्होंने पार्टी की औपचारिक घोषणा कर दी है.
सोशल मीडिया पर किया विचार साझा
तेज प्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए लिखा हम बिहार के समग्र विकास के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं. हमारा लक्ष्य है – बदलाव और एक नई व्यवस्था की स्थापना. इसके लिए हम लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं.
हमलोग बिहार के संपूर्ण विकास के लिए पूर्ण रूप से समर्पित और तत्पर हैं। हमारा मकसद बिहार में संपूर्ण बदलाव कर एक नई व्यवस्था का नव निर्माण करना है।
— Tej Pratap Yadav (@TejYadav14) September 25, 2025
हमलोग बिहार के संपूर्ण विकास के लिए लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।#tejpratapyadav #janshaktijantadal #biharelection pic.twitter.com/GxsQHw0WqQ
पार्टी चिन्ह और पोस्टर का अनावरण
तेज प्रताप ने पार्टी का चुनाव चिन्ह भी जारी कर दिया है. ब्लैकबोर्ड. इसके जरिए शायद वह शिक्षा और जागरूकता पर फोकस करने का संदेश देना चाह रहे हैं. उन्होंने जो आधिकारिक पोस्टर लॉन्च किया है, उसमें लिखा गया है. जन-जन की शक्ति, जन-जन का राज. बिहार का विकास करेंगे तेज प्रताप. इस पोस्टर में उन्होंने देश की पांच महान विभूतियों को शामिल किया है. महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर.
हालांकि एक बात जो साफ तौर पर लोगों की नज़रों में आई, वो यह कि तेज प्रताप यादव ने इस पोस्टर में अपने पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की तस्वीर शामिल नहीं की. इसे लेकर सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.
क्या तेज प्रताप बन पाएंगे बिहार की राजनीति में नई ताकत?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि तेज प्रताप की यह नई पहल उन्हें कितना राजनीतिक लाभ दिला पाती है. क्या वह सिर्फ विरोध का प्रतीक बनेंगे या वाकई जनता के बीच अपनी एक नई पहचान कायम कर पाएंगे — यह आने वाले चुनाव तय करेंगे.
यह भी पढ़ें: वो स्कीम...जिसके तहत आज बिहार में महिलाओं को मिलेंगे 10-10 हजार रुपये