बिहार की सियासत में अपने अलग अंदाज़ और फैसलों के लिए जाने जाने वाले तेजप्रताप यादव ने अब राजनीति से हटकर एक बिल्कुल नया रास्ता चुना है. लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप अब जमीन नहीं, आसमान में उड़ान भरने की तैयारी में जुट गए हैं. जी हां, तेजप्रताप यादव को भारत के उड़ान प्रशिक्षण निदेशालय (DGCA) से वाणिज्यिक विमान चालक यानी CPL (Commercial Pilot License) कोर्स में दाखिले की अनुमति मिल गई है.
तेजप्रताप ने साल 2023-24 में प्राइवेट पायलट लाइसेंस (PPL) और CPL कोर्स के लिए आवेदन किया था, जिसमें उन्होंने इंटरव्यू प्रक्रिया में बेहतरीन प्रदर्शन किया. इसके बाद कोर्ट की अनुमति और DGCA की प्रक्रिया के तहत जारी की गई चयन सूची में उनका नाम पांचवें स्थान पर दर्ज हुआ है. खास बात यह है कि उन्हें सामान्य वर्ग (UR) से चयनित किया गया है.
बिहार उड़ान संस्थान में जल्द शुरू होगी ट्रेनिंग
अब तेजप्रताप यादव जल्द ही बिहार के सरकारी उड़ान संस्थान में दाखिला लेकर अपनी पायलट ट्रेनिंग की शुरुआत करेंगे. इस कोर्स में उन्हें विमान उड़ाने की तकनीकी शिक्षा, सुरक्षा प्रोटोकॉल, और एविएशन से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण पहलुओं की गहन जानकारी दी जाएगी. यह ट्रेनिंग मानसिक, शारीरिक और शैक्षणिक तौर पर काफी demanding होती है—जिसके लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन और फोकस की जरूरत होती है.
तेजप्रताप के aviation की ओर इस झुकाव ने न केवल उनके चाहने वालों को चौंकाया है, बल्कि उनके राजनीतिक विरोधियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. कई लोग इसे उनके राजनीतिक करियर से मोहभंग के रूप में देख रहे हैं—खासतौर पर तब, जब हाल ही में उन्हें अपनी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था.
सिर्फ 20 सीटों में से एक तेजप्रताप के नाम
DGCA द्वारा जारी की गई अंतिम चयन सूची में कुल 20 सीटों के लिए 18 कैंडिडेट्स का चयन हुआ है. इस प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया में तेजप्रताप का पांचवें नंबर पर आना निश्चित रूप से एक उपलब्धि मानी जा रही है. पायलट बनने का यह सपना न केवल उनकी निजी पहचान को एक नया रूप देगा, बल्कि बिहार की राजनीति से जुड़े चेहरों की एक नई छवि भी सामने लाएगा.
राजनीति से विराम या नई उड़ान की तैयारी?
तेजप्रताप का यह कदम क्या राजनीति से दूरी बनाने की कोशिश है या किसी नए राजनीतिक अवतार की तैयारी—यह तो वक्त ही बताएगा. फिलहाल इतना तय है कि तेजप्रताप यादव अब ऊंची उड़ान के लिए तैयार हैं, और उनके इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है.
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