तेल अवीव की सड़कों पर शनिवार को भारी संख्या में लोग उतरे, जिनकी एक ही मांग थी .गाज़ा में चल रहा युद्ध अब खत्म हो और अगवा किए गए सभी इजरायली नागरिकों को सुरक्षित घर लाया जाए. इन प्रदर्शनकारियों की मुख्य चिंता थी कि कहीं एक बार फिर कोई राजनीतिक अड़चन इस प्रक्रिया को बाधित न कर दे. लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग दिखा लोगों को उम्मीद थी कि शायद इस बार रास्ता निकले.
प्रदर्शन में शामिल गिल शेली नामक एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम बेहद चिंतित हैं कि अब तक बंधक घर क्यों नहीं लौटे. हम चाहते हैं कि युद्ध अब रुके. हमें नेतन्याहू पर कोई भरोसा नहीं है, लेकिन फिलहाल ट्रंप की कोशिशों से हमें उम्मीद है.” ऐसे तमाम लोग सड़कों पर मौजूद थे, जो इजरायली सरकार के रवैये से नाखुश दिखे और अमेरिकी मध्यस्थता को इस संकट का समाधान मान रहे थे.
ट्रंप की शांति योजना को हमास की मंज़ूरी
फिलिस्तीन के गाजा पट्टी पर नियंत्रण रखने वाले संगठन हमास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पेश की गई शांति योजना के प्रमुख बिंदुओं पर सहमति जताई है. इस प्रस्ताव में युद्धविराम, इजरायली सेना की वापसी और दोनों ओर से कैदियों व बंधकों की रिहाई जैसे अहम बिंदु शामिल हैं. हमास की इस प्रतिक्रिया के बाद अमेरिका और मध्यस्थ देशों की कोशिशें तेज हो गई हैं. शुक्रवार रात तक ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से हमलों को रोकने की अपील की थी और कहा था कि अब हमास की ओर से शांति की इच्छा जताई गई है.
इजरायल सरकार ने दिखाया लचीलापन
शनिवार सुबह इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर की ओर से बयान जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि इजरायल अब ट्रंप की योजना के पहले चरण को लागू करने के लिए तैयार है. इसका मतलब है कि जल्दी ही इजरायली बंधकों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. हालांकि इस बीच गाज़ा पर इजरायली हवाई हमले भी जारी रहे, लेकिन उनकी तीव्रता पहले की तुलना में कम देखी गई. इससे साफ है कि दोनों पक्षों में बातचीत और योजना को लेकर कुछ हलचल ज़रूर है.
क्या अब खत्म होगा यह खूनी संघर्ष?
अक्टूबर 2023 से शुरू हुआ यह युद्ध अब तक हजारों लोगों की जान ले चुका है और पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता का कारण बन चुका है. लेकिन अब पहली बार, शांति की दिशा में कुछ वास्तविक क़दम उठते दिख रहे हैं. ट्रंप की योजना, हमास की सहमति और नेतन्याहू की तैयारी – ये संकेत दे रहे हैं कि शायद अब इस संघर्ष का अंत नज़दीक है.आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये सारी कूटनीतिक कोशिशें जमीन पर अमल में भी बदलती हैं, या एक और मौका हाथ से निकल जाएगा. लेकिन फिलहाल, बंधकों के परिवार और शांति की चाह रखने वाले लाखों लोगों को उम्मीद की एक नई किरण जरूर दिखाई दे रही है.
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