टोक्यो/बीजिंग: ताइवान को लेकर चीन और जापान के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के हालिया बयान ने विवाद को और हवा दी है. उन्होंने कहा कि अगर चीन ताइवान पर सैन्य हमला करता है, तो जापान अपनी सेना भेजकर मदद करेगा. इस बयान को चीन ने गंभीर रूप से अस्वीकार करते हुए इसे उकसाने वाला और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया.
विवाद तब और गहरा गया जब अगले ही दिन चीन के ओसाका स्थित काउंसल जनरल शुए जियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि इस मामले में दखल देने वाले की “गर्दन काट दी जाएगी.” इस बयान ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम सीमा तक पहुंचा दिया और कूटनीतिक स्तर पर दोनों देशों के राजदूतों को तलब किया गया.
बढ़ती सैन्य हलचल और अमेरिकी प्रतिक्रिया
चीन और जापान के बीच बढ़ते तनाव के बीच रविवार को चीन के कोस्ट गार्ड के जहाज जापान के नियंत्रण वाले सेंकाकू आइलैंड्स के पास देखे गए. इसके जवाब में जापान ने कोस्ट गार्ड को कार्रवाई करते हुए चीनी जहाजों को क्षेत्र से बाहर किया.
अमेरिका ने स्पष्ट किया कि जापान-अमेरिका सुरक्षा समझौते के तहत यदि किसी भी द्वीप या क्षेत्र पर हमला होता है, तो अमेरिका जापान की रक्षा के लिए तैयार है. इस कदम से यह संकेत मिलता है कि ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका की मौजूदगी और सुरक्षा प्रतिबद्धता भी विवाद में अहम भूमिका निभा रही है.
सांस्कृतिक और आर्थिक असर
चीन ने जापान के खिलाफ कूटनीतिक और आर्थिक दबाव भी दिखाना शुरू कर दिया है. हाल ही में, चीन में कुछ जापानी फिल्मों की रिलीज़ पर रोक लगा दी गई है. चीनी मीडिया का कहना है कि यह कदम घरेलू माहौल को देखते हुए सावधानी से उठाया गया है.
चीन के सरकारी मीडिया ने जापान पर आरोप लगाया कि वह ताइवान मुद्दे में बेवजह हस्तक्षेप कर रहा है और इस तरह अपने देश को जोखिम में डाल रहा है. वहीं, जापान ने चीन में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है. इसमें भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचने, अनजान लोगों से बातचीत में सावधानी बरतने, अकेले यात्रा न करने और बच्चों के साथ सतर्क रहने जैसी सलाह दी गई है.
उसी समय, चीन ने भी जापान में पढ़ाई कर रहे अपने छात्रों और नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की. चीन के मुताबिक, जापान में इन दिनों अपराध दर बढ़ी है और वहां चीनी नागरिकों के लिए सुरक्षित वातावरण नहीं है.
सेनकाकू/डियाओयू आइलैंड का विवाद
जापान और चीन के बीच विवाद का एक बड़ा कारण सेंकाकू (जापान) / डियाओयू (चीन) आइलैंड्स है. ये द्वीप जापान के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित हैं और दक्षिण चीन सागर के पास आते हैं. जापान वर्तमान में इन पर नियंत्रण रखता है, लेकिन चीन लगातार अपना दावा करता है.
इन द्वीपों के आसपास 12 मील की अंतर्राष्ट्रीय समुद्री और हवाई मार्ग स्थित है. चीन इसे मान्यता नहीं देता और अक्सर जापान के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करता है. इसे देखते हुए जापानी एयर फोर्स और कोस्ट गार्ड को हमेशा सतर्क रहना पड़ता है.
ताइवान का रणनीतिक महत्व
ताइवान और जापान के बीच केवल 110 किलोमीटर का समुद्री मार्ग है. यह समुद्री क्षेत्र जापान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मुख्य व्यापार मार्ग और सामरिक सुरक्षा का केंद्र है. इसके अलावा, जापान में अमेरिका का सबसे बड़ा विदेशी सैन्य ठिकाना भी मौजूद है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा दृष्टि से अहम भूमिका निभाता है.
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि जापान और अमेरिका ताइवान को औपचारिक रूप से स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं देते. इसके बावजूद, अमेरिका ताइवान की सुरक्षा में मदद करता है और किसी भी जबरन कब्जे का विरोध करता है.
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