पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ा सकती है दुनिया में भूखमरी, जानें क्या है कारण

West Asia Conflict: पश्चिम एशिया में जारी तनाव यदि लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा. दुनिया के कई देशों में भोजन की कीमतें बढ़ने की आशंका है.

Tension in West Asia can increase hunger in the world know what is the reason
प्रतिकात्मक तस्वीर/ chatgpt

West Asia Conflict: पश्चिम एशिया में जारी तनाव यदि लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा. दुनिया के कई देशों में भोजन की कीमतें बढ़ने की आशंका है. विशेष रूप से वे देश जो पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर हैं, वहां रहने वाले लोगों के लिए भोजन जुटाना और कठिन हो सकता है.

फारस की खाड़ी क्षेत्र को अक्सर तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार के लिए जाना जाता है. लेकिन यही ऊर्जा संसाधन उर्वरक उद्योग के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं. प्राकृतिक गैस की मदद से नाइट्रोजन आधारित उर्वरक तैयार किए जाते हैं, जो खेती के लिए बेहद जरूरी होते हैं. यह उर्वरक उन फसलों को पोषण देते हैं, जिनसे दुनिया की लगभग आधी खाद्य आपूर्ति होती है.

उत्पादन जारी, लेकिन आपूर्ति में कठिनाई

इस समय फारस की खाड़ी क्षेत्र में नाइट्रोजन उर्वरक बनाने वाले अधिकांश कारखानों में उत्पादन जारी है. हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गया है, जिससे इन उर्वरकों को किसानों तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है. यही जलमार्ग फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

तेल, गैस और उर्वरकों की कीमतों पर असर

यदि इस जलमार्ग में लंबे समय तक बाधा बनी रहती है, तो तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी आ सकती है. इसके साथ ही उर्वरक और उन्हें तैयार करने में उपयोग होने वाले रसायनों की लागत भी बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में किसान उर्वरकों का उपयोग कम कर सकते हैं, जिससे फसलों का उत्पादन घट सकता है. परिणामस्वरूप दुनिया भर में खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की संभावना है.

रूस और यूक्रेन युद्ध से मिल चुका है संकेत

कुछ वर्ष पहले रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के दौरान भी वैश्विक खाद्य व्यवस्था पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ा था. ये दोनों देश गेहूं और अन्य अनाज के बड़े उत्पादक माने जाते हैं. युद्ध के कारण कई क्षेत्रों में खाद्यान्न की कमी देखने को मिली थी, खासकर पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में.

इस बार उर्वरकों पर अधिक असर की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव का असर सीधे फसल कटाई पर नहीं पड़ेगा, लेकिन उर्वरकों की उपलब्धता पर इसका प्रभाव अधिक गहरा हो सकता है. यदि उर्वरक महंगे या कम उपलब्ध होते हैं, तो खेती पर इसका सीधा असर पड़ेगा. ऐसे में आने वाले समय में वैश्विक खाद्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है और जीवनयापन की लागत भी बढ़ सकती है.

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