पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ा तनाव! जानें तालिबान के पास उपलब्ध हथियारों की पूरी लिस्ट

Taliban Weapons List: पाकिस्तान और तालिबान-प्रशासित अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब तुर्की की राजधानी इस्तांबुल इस कूटनीतिक खींचतान का नया केंद्र बन गया है. यहां पाकिस्तान, तालिबान, तुर्की और कतर के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठे हैं, मकसद है सीमा पर बिगड़ते हालात को काबू में लाना.

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Taliban Weapons List: पाकिस्तान और तालिबान-प्रशासित अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब तुर्की की राजधानी इस्तांबुल इस कूटनीतिक खींचतान का नया केंद्र बन गया है. यहां पाकिस्तान, तालिबान, तुर्की और कतर के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठे हैं, मकसद है सीमा पर बिगड़ते हालात को काबू में लाना. लेकिन इस बातचीत के बीच एक और बड़ी खबर ने सबका ध्यान खींच लिया है, तालिबान के हथियारों की पूरी सूची अब सामने आ चुकी है.

बीबीसी पश्तो की एक रिपोर्ट ने तालिबान के सुरक्षा सूत्रों के हवाले से उन हथियारों का ब्योरा दिया है, जिनसे आज तालिबान की सैन्य ताकत खड़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने अपने हथियार तीन रास्तों से जुटाए, अमेरिकी छोड़े गए हथियार, सोवियत काल की बची सैन्य संपत्ति, और ब्लैक मार्केट.

अमेरिकी और रूसी हथियारों से लैस तालिबान

अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के बाद छोड़े गए हथियार आज तालिबान की सैन्य रीढ़ बन चुके हैं. रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के पास 10 लाख से अधिक हल्के हथियार हैं, जिनमें कलाश्निकोव, अमेरिकी एम-16, एम-4 राइफलें, एम-29 लाइट मशीन गन, पिका एम-2 और एम-240 हेवी मशीन गन शामिल हैं. इसके अलावा, उनके पास ग्रेनेड लांचर, आरपीजी-7 रॉकेट लॉन्चर और एंटी-टैंक मिसाइलें भी हैं.

तोप, मोर्टार और सोवियत दौर की मिसाइलें

तालिबान की ताकत केवल बंदूकों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट बताती है कि संगठन के पास 122 मिमी हॉवित्जर तोपें (डी-30) और लगभग 50 155-मिमी हॉवित्जर मोर्टार हैं. इनके साथ सोवियत काल की ZT-2-23 जैसी भारी हथियार प्रणालियाँ भी मौजूद हैं.

मिसाइल भंडार में भी तालिबान के पास स्कड मिसाइलें, आर-17 और आर-300 एल्ब्रस जैसे घातक हथियार हैं. आर-300 एल्ब्रस की मारक क्षमता करीब 300 किलोमीटर बताई गई है. इसके अलावा, उनके पास लूना (फ्रॉग-7) मिसाइल भी है. हालांकि, हवाई युद्ध के मोर्चे पर तालिबान अब भी कमजोर है, उनके पास एक भी फाइटर जेट नहीं है.

गोरिल्ला वारफेयर में भरोसा

वायु सेना की कमी के बावजूद तालिबान को अपनी गोरिल्ला लड़ाई की रणनीति पर पूरा भरोसा है. बीबीसी पश्तो की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के लड़ाके इन असममित युद्ध तकनीकों में माहिर हैं. यही रणनीति उन्होंने अमेरिका और सोवियत संघ जैसे ताकतवर देशों के खिलाफ अपनाई थी, और अब वही तरीका पाकिस्तान के खिलाफ भी आज़माने की तैयारी में हैं.

तनाव जब अपने चरम पर पहुंचा, तब तालिबान के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को “अमेरिका और रूस से सबक लेने” की सलाह दी थी, एक बयान जिसने क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल मचा दी.

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