बैंकॉक: थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पिछले कुछ महीनों से जारी सीमा विवाद एक बार फिर हिंसक रूप ले गया है. सोमवार को थाईलैंड ने कंबोडियाई सीमा पर हवाई हमले शुरू किए, जिससे दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए सीजफायर की धज्जियाँ उड़ गईं. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पहले हमला करने का आरोप लगा रहे हैं.
यह झड़प इस क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे विवाद का हिस्सा है, जिसमें प्रीह विहियर मंदिर और आसपास की पहाड़ी भूमि शामिल है. ये क्षेत्र दोनों देशों के लिए रणनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है.
पुराना झगड़ा और मंदिर का महत्व
सीमा विवाद की जड़ प्रीह विहियर मंदिर है. यह हिंदू भगवान शिव को समर्पित मंदिर थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर डांगरेक पर्वत की चोटी पर स्थित है.
यह विवाद लंबे समय से दोनों देशों के बीच टकराव की वजह रहा है. छोटे-छोटे सैन्य झगड़े अक्सर बड़ी लड़ाई का रूप ले लेते हैं.
सीजफायर की असफल कोशिशें
इसके बाद अक्टूबर में कुआलालंपुर में विस्तारित समझौते पर हस्ताक्षर हुए. इस दौरान ट्रंप और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी मौजूदगी दी. समझौते में दोनों देशों ने:
पर सहमति जताई.
लेकिन यह समझौता भी केवल 44 दिन चला और अक्टूबर के अंत में ही इसका उल्लंघन हो गया.
सोमवार को फिर से हिंसा
सोमवार को थाईलैंड और कंबोडिया के सैनिकों के बीच सीमा पर फिर से भिड़ंत हुई. थाईलैंड के सेना प्रवक्ता मेजर जनरल विनथाई सुवारी का कहना है कि कंबोडियाई सैनिकों ने थाईलैंड के कई इलाके में पहले गोलीबारी की.
कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता माली सोचेता ने दावा किया कि थाईलैंड ने ही हमला शुरू किया और कंबोडिया ने शुरुआती हमलों का जवाब नहीं दिया. इस हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई के कारण सीजफायर फिर से ध्वस्त हो गया.
सीमा विवाद क्यों नहीं सुलझा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार हिंसा भड़कने की मुख्य वजह दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी है.
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक दोनों देशों के बीच स्थायी समझौता नहीं होगा, तब तक ऐसे सैन्य झटके और हवाई हमले होते रहेंगे.
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