Supermoon 2026: साल 2026 का पहला 'सुपरमून' भारत में देखने को मिला और यह एक खगोलीय घटना बन गई. इसे 'वुल्फ मून' के नाम से भी जाना जाता है, और इस दिन चंद्रमा अपने सामान्य आकार से 30% ज्यादा चमकदार दिखता है. इस विशेष दिन को देखने का मौका कोई भी खगोलीय प्रेमी नहीं छोड़ना चाहता था. लेकिन क्या आपको पता है कि इस 'सुपरमून' को वुल्फ मून क्यों कहा जाता है?
इसे वुल्फ मून क्यों कहते हैं?
'वुल्फ मून' एक खगोलीय घटना का नाम है, जो जनवरी में घटित होती है. यह नाम उत्तरी गोलार्ध की प्राचीन लोककथाओं से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि जनवरी में कड़ी सर्दी के दौरान उत्तरी गोलार्ध में भेड़ों के झुंड के रोने की आवाजें ज्यादा सुनाई देती थीं. ऐसे में उस समय की पूर्णिमा को 'वुल्फ मून' कहा गया. इस दिन चंद्रमा और सूर्य की स्थिति इस तरह से होती है कि चांद अपनी सबसे चमकीली अवस्था में दिखता है, और यही कारण है कि इसे सुपरमून भी कहा जाता है.
चंद्रमा का पेरिजी और सुपरमून
क्या आपने कभी सोचा है कि चांद कभी इतना बड़ा और चमकदार क्यों दिखाई देता है? इसका कारण चंद्रमा का पृथ्वी के करीब होना है. चंद्रमा की कक्षा पूरी तरह से गोल नहीं है, बल्कि अंडाकार है. इसका मतलब यह है कि चांद की पृथ्वी से दूरी हर समय बदलती रहती है. जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक आता है, तो इसे पेरिजी कहते हैं, और उसी समय यह 'सुपरमून' बन जाता है. इस समय चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा से लगभग 30% ज्यादा चमकदार और बड़ा दिखाई देता है.
#WATCH | Rajasthan: The first 'Supermoon' of 2026, popularly known as the 'Wolf Moon', witnessed in Jaipur.
— ANI (@ANI) January 3, 2026
During this celestial event, the moon will appear 30% brighter than an average full moon. pic.twitter.com/gv1lhJhlZs
सुपरमून का महत्व
सुपरमून का अनुभव इसलिए भी खास होता है क्योंकि इस दौरान चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है और इस पर सूर्य की रोशनी ज्यादा स्पष्ट रूप से पड़ती है. इससे चंद्रमा की चमक और आकार में वृद्धि होती है, जो इसे और भी आकर्षक बनाता है. हालांकि, यह अंतर आंखों से स्पष्ट नहीं दिखेगा, लेकिन आपको चांद की चमक में एक विशेष फर्क महसूस होगा.
आज रात को देखिए चांद और बृहस्पति का अद्भुत संगम
अगर आप इस चांद को देखना चाहते हैं, तो आज रात आधी रात के आसपास यह आपके ऊपर चमकता हुआ नजर आएगा. खास बात यह है कि इसके पास ही एक चमकीला तारा भी दिखाई देगा, जो दरअसल ग्रह बृहस्पति होगा. यह दृश्य खगोलीय प्रेमियों के लिए एक अद्भुत अनुभव साबित हो सकता है.
सुपरमून से जुड़ी अन्य खास बातें
सुपरमून के दौरान चंद्रमा पृथ्वी के नजदीक होने के कारण, यह अपनी रोशनी में और भी अधिक चमकता हुआ दिखाई देता है. इस समय सूर्य और चांद के बीच की दूरी भी कुछ खास होती है, जिससे चांद की रोशनी और भी निखर कर सामने आती है. इसीलिए सुपरमून को एक खगोलीय घटना माना जाता है, जो न केवल खगोलशास्त्रियों, बल्कि आम लोगों के लिए भी आकर्षण का कारण बनता है.
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