India Trishul Exercise: भारत का विशाल त्रि-सेवा संयुक्त युद्धाभ्यास ‘त्रिशूल’ (Exercise Trishul) ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी संगठन तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की गतिविधियाँ इस्लामाबाद तक फैल चुकी हैं. इस अभ्यास ने पाकिस्तान की चिंताओं को और बढ़ा दिया है. भारत की थलसेना, नौसेना और वायुसेना द्वारा संचालित यह अभ्यास न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय संतुलन और रणनीतिक तैयारी को भी दर्शाता है.
भारत के इस बहु-क्षेत्रीय युद्धाभ्यास पर पाकिस्तान ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. पाकिस्तान सेना के जनसंपर्क विभाग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ़ चौधरी ने रावलपिंडी में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान भारत को चेतावनी देते हुए कहा, “भारत को यह जान लेना चाहिए कि इस बार हमारा जवाब और भी मजबूत होगा.”
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान भारत के हर सैन्य कदम पर “करीबी नजर” रख रहा है. चौधरी ने आरोप लगाया कि भारत “अरब सागर क्षेत्र में एक और फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन (झूठे हमले की साजिश)” की तैयारी कर रहा है.
“पाकिस्तान की घबराहट झलक रही है”
भारतीय खुफिया एजेंसियों के शीर्ष सूत्रों ने पाकिस्तान के इन बयानों को “रणनीतिक अस्थिरता और घबराहट” का संकेत बताया है. सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति पहले से ही रावलपिंडी की अंदरूनी खींचतान के कारण कमजोर है, और DG ISPR का यह बयान घरेलू मोर्चे पर एकता दिखाने की कोशिश है.
एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, “पाकिस्तान की सेना इस वक्त अपने ही देश में नियंत्रण खो रही है. DG ISPR के बयान का मकसद सिर्फ नैरेटिव सेट करना और जनता का ध्यान आंतरिक संकटों से हटाना है.”
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में लगातार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और TTP के हमलों ने रावलपिंडी को असहज कर दिया है. ऐसे में भारत की सैन्य तैयारियों पर प्रतिक्रिया देना उनके लिए राजनीतिक रूप से जरूरी हो गया है.
त्रिशूल: तीनों सेनाओं की संयुक्त शक्ति का प्रदर्शन
‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास 3 नवंबर 2025 से शुरू हुआ और यह 13 नवंबर तक चलेगा. इसमें भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त भागीदारी है. यह विशाल अभ्यास अरब सागर से लेकर आसमान तक फैले क्षेत्र में किया जा रहा है. इसका मकसद तीनों सेनाओं के बीच संचालनिक समन्वय (Jointness) को बढ़ाना, एकीकृत युद्ध रणनीतियों का परीक्षण करना और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का मूल्यांकन करना है.
सूत्रों के मुताबिक, यह अभ्यास ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद का सबसे बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास है. इसमें वास्तविक परिस्थितियों में नौसैनिक अभियानों, वायु हमलों, जमीनी तैनाती और समुद्री प्रभुत्व के परिदृश्यों का अभ्यास किया जा रहा है. भारतीय रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, “त्रिशूल भारत की संयुक्त सैन्य तैयारी का प्रतीक है. इस तरह के अभ्यास आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहद जरूरी हैं, खासकर जब पड़ोसी देशों की राजनीतिक अस्थिरता और सीमा पार आतंकवाद लगातार बढ़ रहा है.”
पाकिस्तान में रणनीतिक घबराहट
भले ही भारत का यह अभ्यास नियमित वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा हो, लेकिन पाकिस्तान में इसे लेकर असामान्य प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने कथित तौर पर उच्च सतर्कता के आदेश जारी किए हैं, जबकि रक्षा विश्लेषक इसे “अनावश्यक बेचैनी” बता रहे हैं.
इस्लामाबाद के सुरक्षा विश्लेषक अहमद कुरैशी के अनुसार, “भारत की ओर से किए जा रहे किसी भी सैन्य अभ्यास को लेकर पाकिस्तान हमेशा सतर्क रहता है. लेकिन मौजूदा समय में पाकिस्तान के अंदर TTP की बढ़ती गतिविधियाँ, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट ने रावलपिंडी को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है.”
घरेलू अस्थिरता ने बढ़ाई रावलपिंडी की चिंता
TTP ने पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान के भीतर दर्जनों हमले किए हैं, जिनमें सुरक्षा बलों के ठिकाने और पुलिस थाने शामिल हैं. अब संगठन की धमक इस्लामाबाद और पेशावर जैसे बड़े शहरों तक पहुंच चुकी है.
इन हालात में भारत का विशाल संयुक्त अभ्यास पाकिस्तान के लिए सुरक्षा चिंता का विषय बन गया है. विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान की सेना नहीं चाहती कि उसकी “कमजोरी” या “घबराहट” अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर हो, इसलिए वह सख्त बयानबाज़ी के ज़रिए अपनी छवि मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही है.
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
भारत का ‘त्रिशूल’ अभ्यास केवल रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और तैयारियों का संदेश भी है. यह अभ्यास भारत की “जॉइंट ऑपरेशनल डॉक्रिन” को और मजबूत करेगा, जिससे भविष्य में किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने में तीनों सेनाओं की तालमेल क्षमता बढ़ेगी.
वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान के बयान और बढ़ती अस्थिरता क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बन सकते हैं. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, न कि भारत के सैन्य अभ्यासों पर प्रतिक्रिया देकर तनाव बढ़ाना.
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