बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण की तैयारियाँ अब पूरी हो चुकी हैं. राज्य के 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर मंगलवार को मतदान होना है. यह चरण निर्णायक माना जा रहा है, और चुनाव आयोग ने इसे शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल में कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं.
इस बार सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त है कि राज्य को मानो “किले” में तब्दील कर दिया गया है. मतदान वाले जिलों में धरती से लेकर आसमान तक हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी.
चार लाख से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मैदान में
राज्य के डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि दूसरे चरण के चुनाव को देखते हुए सुरक्षा का सबसे बड़ा तंत्र खड़ा किया गया है. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 1,650 कंपनियाँ चुनाव ड्यूटी पर तैनात की गई हैं. इनमें सीआरपीएफ (CRPF), बीएसएफ (BSF), एसएसबी (SSB) और सीआईएसएफ (CISF) के जवान शामिल हैं.
इसके साथ ही बिहार पुलिस के लगभग 60,000 जवान, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (BSAP) के 30,000 जवान और 20,000 होमगार्ड भी चुनावी ड्यूटी में लगाए गए हैं. कुल मिलाकर चार लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी प्रदेशभर में तैनात हैं.
इनमें से अधिकांश बलों को नक्सल प्रभावित जिलों, सीमावर्ती इलाकों और संवेदनशील मतदान केंद्रों पर लगाया गया है.
ड्रोन, सीसीटीवी और घुड़सवार पुलिस
नदी किनारे और दियारा क्षेत्रों में घुड़सवार पुलिस दस्ते भी गश्त कर रहे हैं, जहाँ वाहन या पैदल पहुंचना मुश्किल होता है.
प्रत्येक मतदान केंद्र पर केंद्रीय बलों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है. चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि जब तक केंद्रीय बल मौके पर न पहुँचें, तब तक ईवीएम (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) मशीनें पोलिंग पार्टियों को नहीं सौंपी जाएंगी.
नक्सल प्रभावित इलाकों पर खास नजर
बिहार के कुछ दक्षिणी और मध्यवर्ती इलाके जैसे गया, औरंगाबाद, रोहतास और जमुई को नक्सल प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है. इन जिलों में मतदान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं. हेलीकॉप्टरों की मदद से इन क्षेत्रों में एरियल पेट्रोलिंग भी की जाएगी.
अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों की संभावित गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए विशेष ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं और जंगलों में तलाशी अभियान जारी है.
सीमाएं सील, बाहर से प्रवेश पर रोक
राज्य पुलिस ने बताया है कि सीमावर्ती जिलों में रातभर गश्त और सीसीटीवी मॉनिटरिंग की जा रही है.
मतदान केंद्रों पर सख्त प्रबंधन
राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि हर मतदान केंद्र पर तीन स्तर की सुरक्षा होगी —
संवेदनशील मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की गई है, ताकि मुख्यालय से सीधी निगरानी रखी जा सके.
मतदान कर्मियों के साथ-साथ उम्मीदवारों की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है. हर प्रत्याशी के जुलूस, सभा या जनसंपर्क कार्यक्रम की निगरानी के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं.
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