Indonesia Trident Weapon: दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश इंडोनेशिया अब अपनी रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी कर रहा है. क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और वैश्विक तनाव के बीच इंडोनेशिया ने एक महत्वाकांक्षी ‘त्रिशूल रक्षा योजना’ (Trishul Defense Shield Program) की शुरुआत करने का निर्णय लिया है. इस योजना का उद्देश्य देश की सुरक्षा को कई स्तरों पर सुदृढ़ करना और भविष्य के किसी भी सैन्य खतरे से निपटने की क्षमता विकसित करना है.
‘त्रिशूल योजना’ इंडोनेशिया की नई राजधानी नुसंतरा (Nusantara) की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है. सरकार आने वाले वर्षों में अपनी राजधानी जकार्ता से नुसंतरा स्थानांतरित करने जा रही है, जो बोर्नियो द्वीप पर बनाई जा रही एक आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल स्मार्ट सिटी होगी. इस नई राजधानी को किसी भी बाहरी या साइबर हमले से बचाने के लिए त्रिशूल प्रोजेक्ट को मुख्य रणनीतिक ढांचे के रूप में तैयार किया जा रहा है.
125 अरब डॉलर का रक्षा निवेश
अमेरिकी थिंक टैंक नेशनल इंटरेस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया सरकार ने इस रक्षा परियोजना के लिए लगभग 125 अरब अमेरिकी डॉलर का बजट तय किया है. यह निवेश एशिया के सबसे बड़े सैन्य आधुनिकीकरण अभियानों में से एक माना जा रहा है. इस योजना के तहत देश तीन प्रमुख क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाएगा, स्थल, वायु और समुद्र.
नौसेना और वायुसेना को नई शक्ति
त्रिशूल रक्षा कवच के तहत इंडोनेशिया अपनी नौसैनिक और वायु सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रहा है. योजना के अनुसार:
पनडुब्बियां और फ्रिगेट्स: आधुनिक पनडुब्बियों और तेज रफ्तार मिसाइल सशस्त्र जहाजों की खरीद की जाएगी.
फाइटर जेट्स: इंडोनेशिया पहले ही दो सेकेंड-हैंड डसॉल्ट मिराज 2000-डी/ईडी और 24 बोइंग एफ-15ईएक्स लड़ाकू विमान खरीदने का समझौता कर चुका है.
हेलीकॉप्टर और एयरलिफ्टर: 24 ब्लैक हॉक (Lockheed Martin S-70M) हेलीकॉप्टर और दो एयरबस A400M एटलस एयरलिफ्टर भी इस योजना में शामिल हैं.
ड्रोन सिस्टम: 12 अंका (Turkish Aerospace Industries ANKA) UAVs को शामिल किया जाएगा, जो लंबी दूरी तक निगरानी करने में सक्षम होंगे.
साइबर और डिफेंस टेक्नोलॉजी पर भी फोकस
त्रिशूल योजना सिर्फ पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं है. इसमें साइबर डिफेंस, सैटेलाइट इंटेलिजेंस, और डिजिटल वारफेयर के लिए भी खास प्रावधान रखे गए हैं. इंडोनेशिया अपने टेक्नोलॉजिकल पार्टनर्स, अमेरिका, फ्रांस, तुर्की और चीन से तकनीकी सहयोग ले रहा है.
सैनिकों की भर्ती और प्रशिक्षण
सरकार ने इस योजना के अंतर्गत नई भर्तियों की भी घोषणा की है. युवा सैनिकों को आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे हाईटेक हथियारों और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें.
इंडोनेशिया क्यों कर रहा है इतनी बड़ी तैयारी?
भले ही इंडोनेशिया के पास इस समय कोई प्रत्यक्ष दुश्मन देश नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने उसकी चिंता बढ़ा दी है. दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक गतिविधियों, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया के साथ समुद्री सीमाओं पर छोटे विवाद, और आतंकी नेटवर्क्स से संभावित खतरे ने इंडोनेशिया को अपनी सुरक्षा नीति पुनः व्यवस्थित करने पर मजबूर किया है.
इंडोनेशिया के पास 17,000 से अधिक द्वीप हैं, जिनकी सुरक्षा करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है. इन द्वीपों की निगरानी और नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक सैन्य ढांचे की आवश्यकता है, जिसे ‘त्रिशूल योजना’ पूरा करने का दावा करती है.
नई राजधानी, नई सुरक्षा सोच
नुसंतरा सिर्फ एक नई राजधानी नहीं बल्कि इंडोनेशिया की स्मार्ट नेशनल स्ट्रैटेजी का प्रतीक है. यह शहर पूरी तरह से डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर से लैस होगा, इसलिए साइबर सुरक्षा इस रक्षा कवच का अहम हिस्सा बनेगी.
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