वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका और कनाडा के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्तों के बीच मंगलवार को उस वक्त हल्का तनाव देखा गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को "संयुक्त राज्य अमेरिका का 51वां राज्य" बनाने की संभावना पर एक बार फिर टिप्पणी की. इस पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने स्पष्ट और दृढ़ स्वर में जवाब दिया- जैसे व्हाइट हाउस बिकाऊ नहीं है, वैसे ही कनाडा भी कभी बिकाऊ नहीं होगा.
यह टिप्पणी उस समय आई जब दोनों नेताओं की मुलाकात व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के लिए हो रही थी. ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, “कनाडा के साथ हमारी दोस्ती अटूट है. हम चाहते हैं कि हमारे रिश्ते और भी प्रगाढ़ हों.” इसके साथ ही उन्होंने मज़ाकिया लहजे में कहा कि कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाने का उनका विचार अभी भी बना हुआ है — हालांकि "टैंगो के लिए दो लोगों की ज़रूरत होती है."
कनाडा का संप्रभुता पर जोर
प्रधानमंत्री कार्नी ने ट्रंप की टिप्पणी का जवाब शालीन लेकिन स्पष्ट शब्दों में दिया. उन्होंने कहा, "कुछ चीजें कभी बेची नहीं जातीं- जैसे व्हाइट हाउस, बकिंघम पैलेस, और कनाडा." ट्रंप ने तुरंत ही इस पर हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, "कभी मत कहो कभी नहीं." लेकिन कार्नी ने मुस्कराते हुए दोहराया, "कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं."
राजनयिक हलकों में इसे कनाडा की संप्रभुता और राष्ट्रगौरव के प्रति एक सशक्त और व्यावहारिक बयान माना जा रहा है.
व्यापार और टैरिफ पर मतभेद
जहां दोस्ती की बातें हुईं, वहीं व्यापार को लेकर मतभेद साफ नजर आए. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपनी ऑटोमोबाइल और स्टील इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बनाना चाहता है और इसीलिए कनाडा पर लगाए गए टैरिफ वापस नहीं लिए जाएंगे. उन्होंने कहा, "हम अपनी कारें खुद बनाएंगे, अपना स्टील खुद तैयार करेंगे. हम कनाडा से यह सब नहीं चाहते."
जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री कार्नी कोई ऐसी बात कह सकते हैं जिससे टैरिफ हटाए जा सकें, ट्रंप ने सपाट जवाब दिया, “नहीं.”
चीन और यमन पर अमेरिकी रुख
चीन के संबंध में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ ने बीजिंग की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाला है और अब चीन व्यापार समझौते के लिए दबाव में है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि “सही समय पर” बैठक की जाएगी.
इसके अलावा ट्रंप ने यमन संकट पर एक बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि हूती विद्रोहियों ने अमेरिका को सूचित किया है कि वे अब समुद्री जहाजों पर हमले नहीं करेंगे और संघर्ष को विराम देना चाहते हैं. ट्रंप के अनुसार, “उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है.” ऐसे में अमेरिका यमन में अपनी बमबारी रोकने की दिशा में आगे बढ़ेगा.
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