US Tariff On India: अमेरिका की ओर से भारत के लिए एक अहम और राहत भरी खबर सामने आई है. संकेत मिले हैं कि जल्द ही रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर लगाया गया अमेरिकी टैरिफ हटाया जा सकता है. यह संकेत ऐसे समय पर आए हैं, जब भारत और यूरोप के बीच एक बड़े व्यापार समझौते की घोषणा की तैयारी चल रही है और वैश्विक व्यापार संतुलन में तेजी से बदलाव हो रहा है.
जानकारों के मुताबिक, अगर यह टैरिफ हटता है तो भारत को करीब 5 अरब डॉलर (लगभग 50 हजार करोड़ रुपये) तक का सीधा आर्थिक फायदा हो सकता है. इससे न केवल ऊर्जा आयात सस्ता होगा, बल्कि भारत की रिफाइनरियों और निर्यात क्षमता को भी मजबूती मिलेगी.
यूरोप-अमेरिका तनाव के बीच भारत बना नया ट्रेड हब
मौजूदा हालात में अमेरिका और यूरोप के संबंधों में ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों को लेकर तनाव देखा जा रहा है. ऐसे में यूरोप और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार का एक बड़ा हिस्सा अब भारत की ओर शिफ्ट होने की संभावना जताई जा रही है.
इसी रणनीति के तहत कुछ दिन पहले दावोस में अमेरिका ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने से इनकार कर दिया था. अब उसी कड़ी में अमेरिका भारत के साथ रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाता दिख रहा है. इसे भारत को अपने पक्ष में करने की अमेरिकी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के बयान से मिले संकेत
अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में दिए एक बयान में भारत पर लगाए गए रूसी तेल टैरिफ को लेकर अहम संकेत दिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाया था, जिसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में कमी की.
बेसेंट ने इसे अमेरिकी नीति की सफलता बताते हुए कहा, “टैरिफ लगाने के बाद खरीद में गिरावट आई है. यह एक बड़ी सफलता है. रूसी तेल पर 25 प्रतिशत टैरिफ अभी लागू है, लेकिन मुझे लगता है कि अब इसे हटाने का रास्ता खुल गया है.” उनके इस बयान को साफ तौर पर संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका अब भारत पर से यह अतिरिक्त शुल्क हटाने पर विचार कर रहा है.
यूरोप ने क्यों नहीं लगाया भारत पर टैरिफ?
स्कॉट बेसेंट ने यह भी बताया कि अमेरिका के यूरोपीय सहयोगियों ने भारत पर रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर कोई टैरिफ लगाने से इनकार कर दिया था. इसकी वजह यह थी कि यूरोप भारत के साथ एक बड़े और दीर्घकालिक व्यापार समझौते की तैयारी में है. यूरोपीय देशों का मानना है कि भारत के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी भविष्य में उन्हें रणनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर फायदा पहुंचा सकती है.
ट्रंप का भरोसा: भारत-अमेरिका ट्रेड डील संभव
दावोस में मीडिया से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना करीबी मित्र बताते हुए भरोसा जताया कि तमाम टैरिफ विवादों के बावजूद भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते तक जरूर पहुंचेंगे.
ट्रंप ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी का बहुत सम्मान करता हूं. वे शानदार व्यक्ति हैं और मेरे दोस्त हैं.” हालांकि ट्रंप इससे पहले भारत के रूस से तेल आयात को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराजगी भी जता चुके हैं और दावा किया था कि अमेरिकी दबाव के चलते भारत ने आयात में कुछ हद तक कटौती की है.
टैरिफ को लेकर ट्रंप की सख्त चेतावनी
ट्रंप ने पहले यह भी कहा था कि अगर भारत अमेरिकी रुख से सहमत नहीं होता है, तो उसे व्यापारिक स्तर पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अमेरिका भारत पर तुरंत टैरिफ बढ़ा सकता है, जो भारत के लिए नुकसानदायक होगा.
हालांकि भारत ने कभी भी रूसी तेल आयात को पूरी तरह रोकने का कोई औपचारिक आश्वासन नहीं दिया है. भारत का साफ रुख रहा है कि उसके ऊर्जा संबंधी फैसले राष्ट्रीय हित और घरेलू कीमतों की स्थिरता को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं.
अमेरिकी कांग्रेस में सख्त विधेयक पर बहस
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी कांग्रेस में एक प्रस्तावित विधेयक पर चर्चा चल रही है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया जा सकता है. इस प्रस्ताव को लेकर भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी ऊर्जा नीति का उद्देश्य अपने नागरिकों को किफायती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना है.
भारत की ‘इंडिया फर्स्ट’ ऊर्जा नीति पर अडिग रुख
अमेरिका में बढ़ते विधायी दबाव के बावजूद भारत अपनी ‘इंडिया फर्स्ट’ एनर्जी पॉलिसी पर कायम है. भारत का कहना है कि 1.4 अरब की आबादी के लिए सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस प्रस्तावित विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत इस पूरे घटनाक्रम से अवगत है और इस पर बारीकी से नजर रखे हुए है. उन्होंने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “हम प्रस्तावित विधेयक से अवगत हैं और घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.”
रूस प्रतिबंध और खरीदार देशों पर दबाव
इस मुद्दे पर अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की टिप्पणियां भी अहम मानी जा रही हैं. उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध से जुड़े द्विदलीय विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिससे अमेरिका को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने की ताकत मिलेगी.
इस प्रस्ताव के तहत रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है. फिलहाल भारत और चीन रूस के सबसे बड़े कच्चे तेल खरीदारों में शामिल हैं.
रणनीतिक संतुलन साधने की कोशिश में भारत
इन तमाम वैश्विक दबावों के बीच भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक बाजार की वास्तविकताओं के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका से मिलने वाले हालिया संकेत भारत के लिए राहत भरे माने जा रहे हैं और आने वाले समय में भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकते हैं.
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