Trump On Thailand and Cambodia War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) की आलोचना करते हुए कहा कि अब अमेरिका ही वास्तविक संयुक्त राष्ट्र बन चुका है, क्योंकि UN ने विश्वभर के कई संघर्षों और युद्धों को सुलझाने में कोई प्रभावी भूमिका नहीं निभाई. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उन्होंने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हाल ही में हुए सीजफायर का स्वागत किया और दावा किया कि उन्होंने 8 बड़े युद्धों के समाधान में मदद की है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जानकारी दी कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रहे संघर्ष का अब शांतिपूर्ण समाधान निकाला गया है और दोनों देशों के बीच युद्ध रुक गया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला पहले से निर्धारित संधि के तहत लिया गया और उन्होंने दोनों देशों के नेताओं की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने शांति कायम करने के लिए जल्दी और निष्पक्ष तरीके से समाधान निकाला.
इसके अलावा, ट्रंप ने दावा किया कि उनके दूसरे कार्यकाल के पहले 11 महीनों में ही उन्होंने 8 युद्धों को रोकने में मदद की. इन संघर्षों में थाईलैंड-कंबोडिया, भारत-पाकिस्तान, कोसोवो-सर्बिया, कांगो-रवांडा, इजराइल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया, आर्मेनिया-अजरबैजान जैसे विवाद शामिल हैं. ट्रंप का कहना था कि अमेरिका ही वह देश है जो विश्व में शांति बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने इन संघर्षों में कोई खास योगदान नहीं दिया.
संयुक्त राष्ट्र पर हमला
ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र पर हमला करते हुए कहा, “संयुक्त राष्ट्र के पास विश्व में शांति बनाए रखने के लिए जो आवश्यक संसाधन और क्षमता है, वह उसे ठीक से उपयोग नहीं कर पाया. कई संघर्षों में, जैसे कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध, UN का कोई प्रभावी कदम नहीं दिखाई दिया.” उनका कहना था कि अमेरिका ने न केवल संयुक्त राष्ट्र के बजाय बल्कि दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भी अधिक प्रभावी तरीके से शांति बनाने में योगदान दिया है.
रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप की टिप्पणी
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के संदर्भ में ट्रंप ने कहा कि इस युद्ध की स्थिति काफी गंभीर हो चुकी है और इस पर संयुक्त राष्ट्र का कोई ठोस कदम नहीं आया है. उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र को अब इस तरह के गंभीर मामलों में अधिक सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए.” ट्रंप ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब वह फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित अपने आवास पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात करने वाले हैं. इस बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए संभावित शांति योजनाओं पर चर्चा की जाएगी.
संयुक्त राष्ट्र की आलोचना पहले भी की थी
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की है. इससे पहले, सितंबर में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित करते हुए भी उन्होंने कहा था कि कई मामलों में उन्हें खुद पहल करनी पड़ी, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने मदद करने की कोशिश भी नहीं की. ट्रंप ने यह भी कहा था कि उन्होंने खुद ही कई संघर्षों का समाधान किया, जबकि UN ने इन मुद्दों पर न तो कोई ठोस कदम उठाया और न ही मदद दी.
थाईलैंड और कंबोडिया संघर्ष का समाधान
हालांकि ट्रंप ने अपने दावों को सच बताया, लेकिन यह संघर्ष तो पहले ही कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा विवाद का हिस्सा रहा था. 7 दिसंबर को दोनों देशों के बीच हिंसा फिर से शुरू हुई थी, लेकिन अब दोनों देशों ने सीजफायर की घोषणा की. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने भी इस संघर्ष को लेकर चिंता जताई थी, क्योंकि सीमा से दूर इलाकों में हमले बढ़ रहे थे. हालांकि, अमेरिका ने दोनों देशों से अपील की कि वे 2000 में हुए कुआलालंपुर शांति समझौते की शर्तों को पूरी तरह से लागू करें, और इसका समाधान खोजा.
संयुक्त राष्ट्र के प्रति अमेरिकी दृष्टिकोण
ट्रंप की आलोचना केवल संघर्षों और युद्धों तक सीमित नहीं रही है. उनका यह कहना था कि संयुक्त राष्ट्र को दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए अधिक सक्रिय और प्रभावी होना चाहिए. उनका आरोप था कि संयुक्त राष्ट्र के पास न तो उचित नेतृत्व था और न ही आवश्यक संसाधन थे, जिससे संघर्षों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सके. इसके बजाय, अमेरिका ने अपने कूटनीतिक प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के द्वारा शांति स्थापित करने की कोशिश की.
वैश्विक संघर्षों में अमेरिकी नेतृत्व का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र से काफी पहले अमेरिका ने वैश्विक संघर्षों का समाधान निकाला और शांति स्थापित की. उन्होंने यह दावा किया कि अमेरिका की कड़ी मेहनत और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के जरिए कई संघर्षों को सुलझाने में सफलता प्राप्त हुई है. उनका मानना था कि यदि संयुक्त राष्ट्र के पास अमेरिकी जैसी प्रभावी नीति होती, तो आज पूरी दुनिया में शांति बनी होती.
ट्रंप के इस बयान को लेकर संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह साफ है कि ट्रंप ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली और प्रभावशीलता पर सवाल उठाया है.
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