अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी बेलौस बयानबाज़ी और अप्रत्याशित अंदाज़ के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं. हाल ही में व्हाइट हाउस में तुर्की और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के दौरान उन्होंने एक बार फिर वही तेवर दिखाए, जिसने इन अहम मेहमानों को असहज कर दिया.
गुरुवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने ऐसा बयान दे डाला, जिसकी उम्मीद शायद किसी को नहीं थी. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, एर्दोगन चुनाव धांधली के बारे में सबसे ज़्यादा जानते हैं. यह टिप्पणी सुनते ही कमरे में कुछ पल के लिए माहौल ठंडा पड़ गया. ट्रंप के इस बयान को तुर्की की विपक्षी पार्टियों पर हो रही कार्रवाई और बीते चुनावों में लगे आरोपों से जोड़कर देखा गया. हालांकि ट्रंप ने बाद में इसे हल्का करने की कोशिश की और एर्दोगन को एक "टफ मैन" और "बहुत राय रखने वाला नेता" बताते हुए दोस्ताना अंदाज में भी बात की.
ट्रंप ने दिया सुझाव
बातचीत के दौरान ट्रंप ने एर्दोगन को रूस से तेल आयात बंद करने का सुझाव भी दिया. उन्होंने कहा कि यदि तुर्की इस दिशा में कदम उठाता है, तो अमेरिका उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और एफ-35 लड़ाकू विमान डील को फिर से शुरू करने को तैयार हो सकता है.
पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को आधे घंटे का इंतज़ार, फिर मज़ाक भी
एर्दोगन के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर व्हाइट हाउस पहुंचे, लेकिन उनके लिए स्वागत वैसा नहीं था जैसा आमतौर पर राष्ट्राध्यक्षों को मिलता है. ट्रंप ने उन्हें ओवल ऑफिस के बाहर करीब 30 मिनट तक इंतजार कराया. इतना ही नहीं, ट्रंप ने मीडिया के सामने मजाक करते हुए कहा: "हो सकता है वे लोग पहले से ही इस कमरे में हों, मैं भी नहीं जानता! ये टिप्पणी कूटनीतिक दृष्टिकोण से न केवल असहज करने वाली थी, बल्कि यह इस उच्चस्तरीय मीटिंग की गंभीरता पर भी सवाल खड़े करती है.
मीटिंग के बाद तारीफें लेकिन व्यवहार में सवाल
मुलाकात के बाद ट्रंप ने शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर को "महान नेता" कहकर तारीफों से नवाज़ा. लेकिन जिस तरह से पहले उन्हें इंतज़ार कराया गया और फिर मज़ाक उड़ाया गया, उससे यह मुलाकात भी विवादों में आ गई. ट्रंप की ओर से इस बैठक की कोई तस्वीर या आधिकारिक ब्रीफिंग साझा नहीं की गई, जबकि एर्दोगन के साथ उनकी तस्वीरें तुरंत सार्वजनिक की गईं.पाकिस्तानी पक्ष ने हालांकि इस बातचीत को "सकारात्मक और सहयोगी माहौल में हुई" बताया और कहा कि बैठक करीब 1 घंटा 20 मिनट तक चली. लेकिन कूटनीतिक हलकों में ट्रंप के रवैये को लेकर आलोचना भी हो रही है.
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