रूस–यूक्रेन युद्ध को लगभग तीन साल होने को आए हैं, लेकिन हाल के दिनों में हालात में एक अप्रत्याशित मोड़ देखने को मिला है. गुरुवार की सुबह अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल अचानक यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचा. पेंटागन के अनुसार, यह टीम युद्ध समाप्त करने के संभावित रास्तों पर चर्चा करने के लिए भेजी गई है. प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूएस आर्मी सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल कर रहे हैं और माना जा रहा है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के तुर्की से लौटते ही उनसे मुलाकात होगी.
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और रूस के बीच बैक चैनल के माध्यम से एक नया शांति प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे अनौपचारिक तौर पर “ट्रंप प्लान” कहा जा रहा है.
क्या है 28 बिंदुओं वाला ‘ट्रंप प्लान’?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस प्रस्ताव में कुल 28 बिंदु शामिल हैं. इस मसौदे के प्रमुख तत्व इस प्रकार बताए जा रहे हैं:
1. डोनबास पर रूस का नियंत्रण
योजना में सुझाव दिया गया है कि रूस को लुहान्स्क और दोनेत्स्क पर व्यावहारिक नियंत्रण दे दिया जाए. हालांकि यूक्रेन अभी भी इन दोनों क्षेत्रों के लगभग 14–15% हिस्से पर नियंत्रण रखता है. समझौते का ढांचा ऐसा हो सकता है कि इन इलाकों को डिमिलिट्राइज़्ड ज़ोन घोषित किया जाए, जहां भारी सैन्य तैनाती न हो.
WATCH: The moment a Russian missile struck a residential building in Ternopil. pic.twitter.com/5F0EQpgBta
— Clash Report (@clashreport) November 19, 2025
2. खेरसॉन और ज़ापोरिज्ज़िया में फ्रीज़ लाइन ऑफ कंट्रोल
इन दोनों क्षेत्रों में मौजूदा नियंत्रण रेखा को बिना बदलाव के "फ्रीज़" रखने का प्रस्ताव है. कुछ इलाकों को रूस वापस कर सकता है, लेकिन इस पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है.
3. क्रीमिया पर सबसे बड़ा विवाद
सबसे संवेदनशील और विवादित बिंदु यह बताया जा रहा है कि कई देश- संभवतः अमेरिका सहित—क्रीमिया और डोनबास को रूस का हिस्सा मानने के लिए तैयार हो सकते हैं. हालांकि यूक्रेन को ऐसा कदम औपचारिक रूप से उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा.
4. यूक्रेन की सेना पर पाबंदियों का प्रस्ताव
योजना में यह भी कहा जा रहा है कि यूक्रेन की सेना के आकार और लंबी दूरी की हथियार प्रणाली पर सीमाएँ लगाई जा सकती हैं. बदले में अमेरिका सुरक्षा गारंटी देने पर सहमत हो सकता है, लेकिन ये गारंटी कैसे लागू होंगी यह अभी अस्पष्ट है.
5. मध्यस्थ के रूप में कतर और तुर्की
अंतरराष्ट्रीय सूत्रों के अनुसार इस प्रस्ताव की ड्राफ्टिंग में कतर और तुर्की जैसे देशों की भी भूमिका रही है, जो इसे बहुपक्षीय पहल बनाती है.
बैकडोर डिप्लोमैसी की पुष्टि के संकेत
सूत्रों का कहना है कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और रूस की ओर से किरील दिमित्रीव के बीच लगातार बातचीत हो रही है. बताया यह भी जा रहा है कि कुछ चरणों में यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रुस्तम उमेरोव को कुछ प्रस्ताव सुनने की अनुमति दी गई थी.
हालांकि, यूक्रेन ने यह साफ किया है कि उसे अब तक कोई लिखित ड्राफ्ट नहीं मिला है और जिन बिंदुओं का जिक्र मीडिया में हो रहा है, उनमें से कई से यूक्रेन सहमत नहीं है.
कोई भी क्षेत्रीय रियायत स्वीकार नहीं- यूक्रेन
कीव ने बार-बार दोहराया है कि वह किसी भी हालत में अपनी भूमि का त्याग नहीं करेगा. ज़ेलेंस्की प्रशासन का कहना है कि रूस को कोई भी भूभाग सौंपना यूक्रेन की संप्रभुता के खिलाफ है और इससे आगे भविष्य में और बड़े आक्रमण को बढ़ावा मिल सकता है.
रूस ने सार्वजनिक रूप से चुप्पी बनाए रखी
रूसी नेतृत्व ने इस कथित शांति प्रस्ताव पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है. मॉस्को का आधिकारिक रुख अब भी वही है कि यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की योजना छोड़नी होगी और सुरक्षा व्यवस्था पर नई समझ बनानी होगी.
यूक्रेन में ताज़ा हमले से तनाव बढ़ा
इन कूटनीतिक चर्चाओं के बीच, पश्चिमी यूक्रेन के शहर तेरनोपिल में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबर आई, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई. सामने आए वीडियो में देखा गया कि मिसाइलें रिहायशी इलाकों पर गिर रही हैं. हमलों के तुरंत बाद नाटो सदस्य देश पोलैंड ने अपने चेतावनी और लड़ाकू विमानों को उड़ान भरने का आदेश दे दिया.
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