वाशिंगटन/मास्को: वैश्विक भू-राजनीति के तापमान में एक बार फिर तेजी से उबाल आता दिख रहा है. अमेरिका और रूस के बीच की पुरानी खींचतान अब एक नए और कहीं अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है, जिसे अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक "कोल्ड वॉर पार्ट 2" की संज्ञा देने लगे हैं. इस बार चिंगारी भड़की है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से जिसमें उन्होंने यह खुलासा किया कि उन्होंने दो परमाणु-सक्षम पनडुब्बियों को रूस की सीमाओं के करीब "उपयुक्त क्षेत्रों" में तैनात करने का आदेश दिया है.
ट्रंप ने यह बात शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर साझा की. उन्होंने दावा किया कि यह कदम उन्होंने रूस के पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव के हालिया बयानों के जवाब में उठाया है, जो ट्रंप के अनुसार "सीधे युद्ध की धमकी" के दायरे में आते हैं.
मेदवेदेव की चेतावनी और ट्रंप की प्रतिक्रिया
मामला उस समय उभरा जब मेदवेदेव ने बेहद तीखे शब्दों में ट्रंप को चेतावनी दी. उन्होंने कहा, "हर अल्टीमेटम अमेरिका को युद्ध की ओर ले जाता है. रूस ईरान या इज़रायल नहीं है, जो हर बार चुप बैठ जाए." यह बयान ट्रंप के उस अल्टीमेटम के बाद आया था जिसमें उन्होंने रूस को यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए सिर्फ 10 दिन की मोहलत दी थी जो पहले 50 दिन हुआ करती थी.
मेदवेदेव के जवाब ने ट्रंप को भड़काया और उन्होंने तुरंत पलटवार किया. ट्रंप ने लिखा, "किसी को उसे (मेदवेदेव को) याद दिलाना चाहिए कि वह अब राष्ट्रपति नहीं है. अपनी औकात में रहे." उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने दो न्यूक्लियर सबमरीन तैनात करने का आदेश सिर्फ इसीलिए दिया ताकि "अगर मेदवेदेव के शब्द खाली धमकी नहीं, बल्कि एक्शन का संकेत हैं, तो अमेरिका तैयार रहे."
भारत पर भी तंज कसा ट्रंप ने
अपने रूस विरोधी रुख के बीच ट्रंप ने भारत पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि भारत के टैरिफ "दुनिया में सबसे ज्यादा" हैं और इसी वजह से अमेरिका ने उसके साथ व्यापारिक गतिविधियों में कटौती की है. ट्रंप ने तल्ख अंदाज़ में कहा, "मुझे फर्क नहीं पड़ता कि भारत और रूस मिलकर क्या करते हैं. वे अपनी मरती हुई अर्थव्यवस्थाएं ले जाकर कहीं भी डुबाएं, मुझे कोई परवाह नहीं."
हालांकि यह बयान उस वक्त आया है जब भारत ने अमेरिका से रक्षा खरीद और रणनीतिक साझेदारी में पहले से कहीं अधिक सक्रिय भूमिका निभाई है. ट्रंप के इस रुख को विश्लेषकों ने "विकट कूटनीतिक असंतुलन" बताया है.
पुतिन से भी नाराज़ हैं ट्रंप
यह तनाव सिर्फ मेदवेदेव तक सीमित नहीं है. ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भी गुस्सा जाहिर किया. स्कॉटलैंड की अपनी हालिया यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, "मैं अब पुतिन से भी निराश हूं. जब रास्ता इतना साफ है, तो फैसला आज क्यों नहीं लिया जा सकता? अब और इंतज़ार नहीं होना चाहिए." यह बयान उस वक्त आया है जब क्रेमलिन ने ट्रंप के पनडुब्बियों की तैनाती वाले बयान को 'गंभीर उकसावे' के रूप में देखा है.
दुनिया के सामने नए शीत युद्ध का खतरा?
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम और बयानबाज़ी वैश्विक मंच पर असहजता का कारण बन चुकी है. यह स्थिति उस समय और गंभीर हो जाती है जब हम समझें कि अमेरिका और रूस दोनों के पास प्रचुर मात्रा में परमाणु हथियार हैं और ऐसे कदम वैश्विक शांति के लिए बेहद जोखिमपूर्ण हैं. एक पनडुब्बी की तैनाती न केवल एक सैन्य संकेत है, बल्कि यह उस भू-राजनीतिक मनोवृत्ति को भी दर्शाता है जिसमें संवाद की जगह अब शक्ति प्रदर्शन ले रहा है.
अमेरिकी विदेश विभाग और पेंटागन ने अभी तक ट्रंप के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों ने इसे "डिप्लोमेसी को दरकिनार कर सैन्य समाधान की ओर बढ़ने वाला संकेत" बताया है.
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