ट्रंप के टैरिफ का चीन पर असर! अर्थव्यवस्था डगमगाई, एक साल के निचले स्तर पर पहुंची GDP

Chinese Economy: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इस समय बहुस्तरीय आर्थिक दबावों से जूझ रही है. वैश्विक व्यापार तनाव, विशेष रूप से अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद, और घरेलू मांग में गिरावट के कारण चीन की विकास दर 2025 की तीसरी तिमाही में एक साल के निचले स्तर पर आ गई है.

Trump tariffs impact China Economy falters GDP reaches one-year low
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Chinese Economy: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इस समय बहुस्तरीय आर्थिक दबावों से जूझ रही है. वैश्विक व्यापार तनाव, विशेष रूप से अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद, और घरेलू मांग में गिरावट के कारण चीन की विकास दर 2025 की तीसरी तिमाही में एक साल के निचले स्तर पर आ गई है.

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की जीडीपी में जुलाई से सितंबर के बीच 4.8% की वृद्धि दर्ज की गई, यह आंकड़ा बीते चार तिमाहियों में सबसे कमजोर रहा. हालांकि यह तिमाही आधार पर अपेक्षाओं से बेहतर है, लेकिन उपभोक्ता विश्वास, संपत्ति क्षेत्र की सुस्ती और निवेश में गिरावट जैसी संरचनात्मक चुनौतियां अब और अधिक उभरकर सामने आ रही हैं.

घरेलू मोर्चे पर मंदी, विदेशी बाजारों से अस्थायी सहारा

सितंबर में खुदरा बिक्री की वृद्धि महज़ 3.0% रही, जो पिछले 10 महीनों का सबसे निचला स्तर है. इसके साथ ही प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट में 0.5% की सालाना गिरावट दर्ज की गई, जो महामारी के बाद पहली गिरावट मानी जा रही है. इस मंदी का असर उन उद्योगों पर अधिक पड़ा है जो घरेलू खपत पर निर्भर हैं.

हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग और कुछ विदेशी बाजारों को निर्यात में वृद्धि से कुछ राहत जरूर मिली है. यूरोपीय यूनियन, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका को निर्यात में क्रमश: 14%, 15.6% और 56.4% की वृद्धि देखी गई है. बावजूद इसके, अमेरिकी बाजार में निर्यात 27% घटा है और कंपनियों को अपनी कीमतें कम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

नीतिगत अनिश्चितता और व्यापार तनाव

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव अभी भी पूरी तरह सुलझा नहीं है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर से चीनी वस्तुओं पर टैरिफ को 100% तक बढ़ाने की चेतावनी दी है. हालांकि, दक्षिण कोरिया में APEC शिखर सम्मेलन के दौरान संभावित ट्रंप-शी बैठक की उम्मीदों के चलते कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की गुंजाइश बनी हुई है.

नीति और दीर्घकालिक रणनीति की दिशा

नीतिगत मोर्चे पर चीन के नीति निर्धारक इस समय 15वीं पंचवर्षीय योजना पर मंथन कर रहे हैं, जिसमें हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और पेंशन सुधार जैसे दीर्घकालिक मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है. विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में उपभोक्ता-केंद्रित प्रोत्साहन सीमित रहेगा, क्योंकि सरकार का ध्यान आर्थिक ढांचे के पुनर्गठन पर है.

क्या आगे की राह कठिन है?

औद्योगिक उत्पादन में सितंबर में 6.5% की वृद्धि दर्ज की गई, जो अगस्त की 5.2% की तुलना में बेहतर है. लेकिन यह असमानता और घरेलू मांग में कमी यह संकेत देती है कि चीन की अर्थव्यवस्था एक नाज़ुक संतुलन पर टिकी है.

सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है, एक ओर जीडीपी में निरंतरता बनाए रखना और दूसरी ओर उन दीर्घकालिक समस्याओं का समाधान करना जो उपभोक्ता विश्वास, संपत्ति निवेश और घरेलू खपत को प्रभावित कर रही हैं.

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