दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर किए गए इजरायली हमले के बाद वॉशिंगटन से एक बड़ा फैसला सामने आया है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें कतर की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा का सीधा वचन दिया गया है.
ट्रंप के इस आदेश में कहा गया है कि अगर किसी देश ने कतर की राजधानी दोहा या उसके किसी भी हिस्से पर हमला करने की कोशिश की, तो अमेरिका उस स्थिति में सैन्य हस्तक्षेप से भी पीछे नहीं हटेगा. यह सख्त संदेश ऐसे समय आया है जब कुछ ही हफ्ते पहले इजरायल ने दोहा में हमास के वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक की थी.
इजरायल को ट्रंप की दो टूक चेतावनी
बताया जा रहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले को लेकर खुद कतर के प्रधानमंत्री से माफी मांगी है. नेतन्याहू की यह सफाई उस वक्त आई जब गाज़ा युद्ध को रोकने और बंधकों की रिहाई को लेकर कतर की मध्यस्थता जरूरी मानी जा रही थी. लेकिन इजरायली हमले के बाद कतर ने इस प्रक्रिया से दूरी बना ली थी, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए. ऐसे में ट्रंप का यह कार्यकारी आदेश सिर्फ एक रणनीतिक कदम नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक दबाव भी माना जा रहा है — खासतौर पर इजरायल के लिए.
अमेरिका-कतर की मजबूत साझेदारी पर मुहर
कार्यकारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि कतर, अमेरिका का लंबे समय से विश्वसनीय सहयोगी रहा है. क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में, और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेज़बानी के मामले में, कतर की भूमिका बेहद अहम रही है.आदेश के अनुसार, अमेरिका कतर की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करेगा. अगर कतर पर कोई भी हमला होता है, तो उसे अमेरिका अपनी शांति और सुरक्षा के खिलाफ सीधी चुनौती मानेगा और उस पर पूरी ताकत से जवाब देगा.
सेना और खुफिया एजेंसियों को मिले निर्देश
इस आदेश में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों को संयुक्त रूप से एक रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया गया है. इसका मकसद यह है कि किसी भी संभावित बाहरी हमले की स्थिति में तुरंत और प्रभावी जवाब दिया जा सके. साथ ही, अमेरिकी विदेश मंत्री को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह इस सुरक्षा आश्वासन को लगातार दोहराते रहें और क्षेत्रीय सहयोगियों को भी इसके लिए तैयार रखें. आदेश में यह भी कहा गया है कि कतर की कूटनीतिक अनुभव और मध्यस्थता क्षमता को क्षेत्रीय शांति के लिए लगातार इस्तेमाल में लाया जाए.
दोहा स्ट्राइक के बाद बढ़ा तनाव
गौरतलब है कि 9 सितंबर को हुए इजरायली हमले के बाद दोहा और तेल अवीव के रिश्तों में खिंचाव आ गया था. इस स्ट्राइक में हमास के कुछ शीर्ष नेता निशाने पर थे, जिससे कतर ने खुद को शांति वार्ता से अलग कर लिया था. इसके बाद गाज़ा में युद्ध विराम और बंधकों की रिहाई को लेकर चल रही बातचीत अधर में लटक गई थी.नेतन्याहू द्वारा माफी मांगने और ट्रंप के कार्यकारी आदेश के ज़रिए अमेरिका की सख्त भूमिका सामने आने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कतर फिर से मध्यस्थता की मेज़ पर लौटता है या नहीं.
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